सोशल संवाद/डेस्क: देश में दिव्यांगों की सुविधा को लेकर Supreme Court of India ने अहम टिप्पणी की है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि देशभर में चलने वाली कैब सेवाओं को दिव्यांग व्यक्तियों के अनुकूल बनाना अब जरूरी हो गया है। कोर्ट ने साफ कहा कि कैब में व्हीलचेयर और अन्य सहायक उपकरण रखने की उचित व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि दिव्यांगों को यात्रा में किसी तरह की परेशानी न हो।
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जस्टिस Vikram Nath और जस्टिस Sandeep Mehta की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए इसे 24 मार्च तक स्थगित कर दिया है और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल Aishwarya Bhati से इस पर सहायता मांगी है।
सुनवाई के दौरान ‘फर्स्ट और लास्ट माइल कनेक्टिविटी’ पर भी जोर दिया गया, यानी घर से सार्वजनिक परिवहन तक और वहां से गंतव्य तक पहुंच को आसान बनाना। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि नियम होने के बावजूद उनका सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है। कई कैब में सीएनजी सिलेंडर की वजह से व्हीलचेयर रखने में दिक्कत आती है, जिससे दिव्यांगों को असुविधा और भेदभाव का सामना करना पड़ता है।
इस पर कोर्ट ने सुझाव दिया कि दिव्यांगों के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई कैब या अलग कैरियर की व्यवस्था की जानी चाहिए। अदालत ने यह भी माना कि बड़े शहरों में कैब सेवाएं अब सार्वजनिक परिवहन का अहम हिस्सा बन चुकी हैं, इसलिए इन्हें समावेशी बनाना समय की मांग है।
फिलहाल यह मुद्दा एक समिति के सामने लंबित है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि दिव्यांगों की सुविधा सुनिश्चित करना सरकार और व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी है।









