सोशल संवाद / डेस्क : तमिलनाडु में 31 जुलाई से चिकन की बिक्री प्रभावित हो सकती है। तमिलनाडु चिकन ट्रेडर्स फेडरेशन ने राज्यभर में चिकन की बिक्री बंद करने का ऐलान किया है। इस फैसले को पुडुचेरी के चिकन व्यापारियों ने भी समर्थन दिया है। हालांकि, यह सरकारी प्रतिबंध नहीं, बल्कि व्यापारियों के संगठन द्वारा किया गया विरोध है।
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क्यों बंद हो रही है चिकन की बिक्री?
फेडरेशन का आरोप है कि कई ब्रॉयलर कंपनियां सरकार के ’12 घंटे पहले फीड बंद करने’ (Pre-Slaughter Feed Withdrawal) नियम का पालन नहीं कर रही हैं। उनका कहना है कि इस लापरवाही के कारण अस्वच्छ परिस्थितियों में चिकन बाजार तक पहुंच रहा है, जिससे उपभोक्ताओं की सेहत पर खतरा बढ़ सकता है।
12 घंटे पहले फीड बंद करना क्यों जरूरी?
विशेषज्ञों के अनुसार, मुर्गों को स्लॉटर से कम से कम 12 घंटे पहले दाना बंद करना जरूरी होता है। इससे उनकी आंतें खाली हो जाती हैं और प्रोसेसिंग के दौरान संक्रमण का खतरा कम रहता है।
यदि यह नियम नहीं अपनाया जाए तो:
- चिकन में साल्मोनेला, ई. कोलाई और कैंपिलोबैक्टर जैसे बैक्टीरिया फैलने का खतरा बढ़ सकता है।
- ट्रांसपोर्ट के दौरान अधिक गंदगी फैलती है।
- मांस की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
व्यापारियों का आरोप क्या है?
फेडरेशन का कहना है कि उन्होंने कई बार ब्रॉयलर कंपनियों को नियमों का पालन करने के लिए कहा, लेकिन सुधार नहीं हुआ। उनका आरोप है कि कंपनियां अतिरिक्त वजन बढ़ाने के लिए मुर्गों को ट्रक में लोड होने तक दाना खिलाती रहती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे एक मुर्गे का वजन लगभग 100 ग्राम तक बढ़ जाता है। अतिरिक्त फीड पर कंपनियों का खर्च कुछ रुपये होता है, लेकिन बढ़े हुए वजन का आर्थिक बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ता है।
क्या यह सरकारी बैन है?
नहीं। तमिलनाडु सरकार ने चिकन की बिक्री पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है। यह फैसला केवल तमिलनाडु चिकन ट्रेडर्स फेडरेशन का है और इसे विरोध के रूप में लागू किया जा रहा है।
किन-किन पर पड़ेगा असर?
अगर बिक्री लंबे समय तक बंद रहती है तो इसका असर कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है।
- आम उपभोक्ताओं को चिकन की उपलब्धता कम हो सकती है।
- होटल, रेस्तरां, बिरयानी और फास्ट फूड कारोबार प्रभावित हो सकता है।
- छोटे चिकन विक्रेताओं की आय पर असर पड़ेगा।
- पोल्ट्री किसानों को आर्थिक नुकसान हो सकता है।
- ट्रांसपोर्ट, फीड निर्माता, प्रोसेसिंग यूनिट और कोल्ड स्टोरेज उद्योग भी प्रभावित हो सकते हैं।
क्या चिकन महंगा हो सकता है?
यदि विवाद कुछ दिनों में सुलझ जाता है तो कीमतों पर सीमित असर पड़ सकता है। लेकिन यदि सप्लाई लंबे समय तक बाधित रही, तो मांग और उपलब्धता के आधार पर चिकन की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
भारत के पोल्ट्री उद्योग पर कितना असर?
भारत दुनिया के प्रमुख पोल्ट्री उत्पादक देशों में शामिल है। यह उद्योग 70 हजार करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक योगदान देता है और 40 लाख से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराता है। तमिलनाडु देश के प्रमुख पोल्ट्री उत्पादक राज्यों में से एक है, इसलिए यहां सप्लाई प्रभावित होने का असर स्थानीय बाजार पर तेजी से दिखाई दे सकता है।
फिलहाल आगे क्या?
अभी पूरा मामला ब्रॉयलर कंपनियों और व्यापारियों के बीच बातचीत पर निर्भर है। यदि कंपनियां सरकारी नियमों के पालन का भरोसा देती हैं और दोनों पक्षों के बीच सहमति बन जाती है, तो चिकन की बिक्री सामान्य हो सकती है। लेकिन यदि विवाद जारी रहा तो इसका असर उपभोक्ताओं से लेकर पूरे पोल्ट्री उद्योग और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।









