सोशल संवाद / जमशेदपुर: डेंगू के बढ़ते खतरे को देखते हुए टाटा स्टील ने शहर में इसकी रोकथाम के लिए निगरानी, मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करने, जनजागरूकता और त्वरित कार्रवाई अभियान तेज कर दिया है। टाटा स्टील यूआईएसएल के माध्यम से संचालित इस अभियान में नागरिकों की भागीदारी पर विशेष जोर दिया जा रहा है। कंपनी के अनुसार, लगातार चलाए जा रहे प्रयासों से डेंगू की स्थिति को काफी हद तक नियंत्रण में रखने में मदद मिली है।
यह भी पढ़े : बिरसानगर में जुए के अड्डे पर पुलिस की रेड, 15 गिरफ्तार; 7.67 लाख रुपये नकद जब्त
4.89 लाख से अधिक घरों का सर्वे
टाटा स्टील के व्यापक मच्छर नियंत्रण अभियान के तहत इस सीजन में अब तक 4,89,601 घरों का सर्वेक्षण किया जा चुका है। घर-घर जाकर किए जा रहे निरीक्षण के दौरान मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान कर उन्हें नष्ट किया जा रहा है।
अभियान के दौरान घरों के अंदर मच्छरों के प्रजनन के 14,193 और घरों के बाहर 11,855 स्थलों को नष्ट किया गया है। इस प्रकार अब तक कुल 26 हजार से अधिक संभावित प्रजनन स्थलों को समाप्त किया जा चुका है।
जहां भी मच्छरों के पनपने की संभावना मिलती है, वहां टीम तत्काल कार्रवाई करती है। साथ ही लोगों को घरों में साफ-सफाई रखने, पानी जमा नहीं होने देने और नियमित रूप से पानी के बर्तनों की जांच करने के लिए जागरूक किया जाता है।
हाउस इंडेक्स में आई गिरावट
डेंगू नियंत्रण अभियान की प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए हाउस इंडेक्स (एचआई) पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। यह सूचकांक उन घरों के अनुपात को दर्शाता है, जहां मच्छरों के प्रजनन के प्रमाण मिलते हैं।
टाटा स्टील के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से सितंबर तक औसत हाउस इंडेक्स 2.7 रहा, जो निर्धारित परिचालन लक्ष्य 5 से कम है। वहीं, सितंबर महीने में यह घटकर 2.4 पर पहुंच गया। कंपनी का कहना है कि लगातार निगरानी और प्रजनन स्थलों को नष्ट करने के प्रयासों से स्थिति में सुधार आया है।
जागरूकता अभियान से हजारों लोग जुड़े
टाटा स्टील की ओर से डेंगू की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे #PaltiMaar3 अभियान के तहत स्कूलों और विभिन्न समुदायों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
इस सीजन में अब तक 212 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। स्कूलों में 104 नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से विद्यार्थियों और आम लोगों को डेंगू से बचाव के उपाय बताए गए हैं। इसके अलावा, फील्ड टीमों ने घर-घर जाकर 4.40 लाख से अधिक स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता संवाद किए हैं।
अभियान का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि डेंगू से बचाव की शुरुआत घर से होती है और हर सप्ताह कुछ मिनट देकर मच्छरों के प्रजनन को रोका जा सकता है।
डेंगू रोकथाम के दूत बन रहे बच्चे
डेंगू नियंत्रण अभियान में स्कूलों और विद्यार्थियों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नुक्कड़ नाटक, संवादात्मक सत्र और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को मच्छरों के संभावित प्रजनन स्थलों की पहचान करना सिखाया जा रहा है।
विद्यार्थियों को अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी साफ-सफाई रखने तथा घरों में पानी जमा नहीं होने देने के लिए प्रेरित करने को कहा जा रहा है। इससे बच्चों के माध्यम से परिवारों और समुदायों तक जागरूकता पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
विशेष वाहनों से कचरा और अनुपयोगी सामान हटाने की पहल
नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए टाटा स्टील यूआईएसएल के सेवा क्षेत्र में अब तक 92 आईईसी वैन-कम-कंटेनर संग्रह अभियान चलाए गए हैं।
इन विशेष वाहनों के माध्यम से लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ फेंके गए टायर, डिब्बे और अन्य ऐसे अनुपयोगी सामान एकत्र किए जाते हैं, जिनमें बारिश का पानी जमा होकर मच्छरों के प्रजनन का कारण बन सकता है। इस पहल के तहत जागरूकता के साथ-साथ सीधे तौर पर प्रजनन स्थलों को समाप्त करने का काम किया जा रहा है।
लापरवाही पर नोटिस और कार्रवाई
डेंगू नियंत्रण के लिए निगरानी और जागरूकता के साथ नियमों के अनुपालन पर भी जोर दिया जा रहा है। टाटा स्टील के अनुसार, मच्छरों के प्रजनन से जुड़ी 2,654 घटनाओं की जानकारी उचित कार्रवाई के लिए जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) को दी गई है। वहीं, जिन घरों और परिसरों में मच्छरों के प्रजनन की स्थिति पाई गई, वहां 2,115 नोटिस जारी किए गए हैं।
कंपनी का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि लोगों को यह समझाना है कि डेंगू की रोकथाम सभी की साझा जिम्मेदारी है।
9 सितंबर तक जिले में डेंगू के 21 पुष्ट मामले
टाटा स्टील की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, 9 सितंबर 2026 तक जमशेदपुर जिले में डेंगू के 21 पुष्ट मामले सामने आए थे। इनमें से नौ मामले टाटा स्टील यूआईएसएल के सेवा क्षेत्र के थे।
किसी भी मामले की पुष्टि होने पर संबंधित इलाके में निगरानी बढ़ाई जाती है। इसके साथ ही मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करने, लोगों को जागरूक करने और फॉगिंग जैसी गतिविधियां संचालित की जाती हैं, ताकि संक्रमण के आगे फैलने की आशंका को कम किया जा सके।
फॉगिंग के साथ स्रोतों को नष्ट करना जरूरी
डेंगू प्रभावित इलाकों में फॉगिंग भी की जा रही है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार, केवल फॉगिंग से डेंगू पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया जा सकता। एडीज एजिप्टी मच्छर घरों के अंदर और आसपास रखे पानी के छोटे-छोटे बर्तनों, कूलर, गमलों, टायरों तथा अन्य पात्रों में जमा पानी में पनप सकते हैं।
इसलिए डेंगू से बचाव के लिए मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान करना, उन्हें नष्ट करना और दोबारा पानी जमा होने से रोकना सबसे महत्वपूर्ण है।
हर सप्ताह 10 मिनट दें, डेंगू से बचाव में निभाएं भूमिका
टाटा स्टील ने शहरवासियों से अपील की है कि वे हर सप्ताह कम से कम 10 मिनट निकालकर अपने घर और आसपास के क्षेत्रों की जांच करें। पानी की टंकियों और बर्तनों को ढककर रखें तथा कूलर, गमलों, छतों, पुराने टायरों और फेंके गए सामान में पानी जमा न होने दें।
टाटा स्टील की ओर से कहा गया कि समुदाय के स्वास्थ्य और कल्याण को प्राथमिकता देते हुए डेंगू की रोकथाम के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, इस अभियान की सफलता नागरिकों की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करती है। प्रत्येक परिवार की छोटी-सी नियमित पहल पूरे शहर को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
एक शहर, एक लक्ष्य
करीब 4.9 लाख घरों का सर्वेक्षण, 26 हजार से अधिक मच्छर प्रजनन स्थलों का नष्ट किया जाना, 4.40 लाख से अधिक स्वास्थ्य जागरूकता संवाद और 212 जागरूकता कार्यक्रम टाटा स्टील के डेंगू नियंत्रण अभियान के प्रमुख आंकड़े हैं।
टाटा स्टील यूआईएसएल, स्थानीय निकायों, स्कूलों और अन्य संबंधित संस्थाओं के सहयोग से शहर में डेंगू रोकथाम के लिए व्यापक अभियान चला रही है।
कंपनी ने नागरिकों से अपील की है कि वे हर सप्ताह एक दिन को ‘ड्राई डे’ यानी पानी जमा होने से रोकने का दिन बनाएं और अपने घर को डेंगू रोकथाम का केंद्र बनाएं।
टाटा स्टील का संदेश: “हर सप्ताह 10 मिनट दें। जांचें, साफ करें और ढकें। मिलकर हम जमशेदपुर को डेंगू मुक्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।”










