सोशल संवाद / जमशेदपुर : Tata Steel ने भारतीय रेलवे के साथ दीर्घकालिक टैरिफ अनुबंध (Long Term Tariff Contract-LTTC) किया है। इस समझौते से कंपनी को माल ढुलाई की लागत नियंत्रित रखने और रेलवे से रैक व वैगन की उपलब्धता में प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है। तीन से पांच साल की अवधि वाले इस करार से जमशेदपुर स्थित टाटा स्टील प्लांट की कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार स्टील की ढुलाई व्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
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मालभाड़े में अचानक बढ़ोतरी से मिलेगी राहत
इस समझौते का एक प्रमुख फायदा मालभाड़े की दरों में स्थिरता है। अनुबंध की शर्तों के तहत बीच वर्ष में रेलवे की ओर से माल ढुलाई की दरों में होने वाली बढ़ोतरी का अतिरिक्त बोझ कंपनी पर नहीं पड़ेगा। इससे टाटा स्टील को लंबी अवधि के लिए परिवहन खर्च का अनुमान लगाने और अपनी व्यावसायिक योजनाएं तैयार करने में आसानी होगी।
इसके अलावा, निर्धारित मात्रा से अधिक माल ढुलाई करने पर कंपनी को विशेष मालभाड़ा छूट का लाभ भी मिल सकता है।
रैक और वैगन की उपलब्धता में मिलेगी प्राथमिकता
Tata Steel के जमशेदपुर प्लांट में उत्पादन के लिए लौह अयस्क समेत कई कच्चे माल की नियमित आपूर्ति जरूरी है। नोवामुंडी और ओडिशा के जोड़ा क्षेत्र की खदानों से कच्चा माल जमशेदपुर पहुंचाया जाता है। वहीं, तैयार स्टील को देश के अलग-अलग हिस्सों और बंदरगाहों तक भेजने में भी रेलवे की अहम भूमिका है।
ऐसे में रैक और वैगन की उपलब्धता में प्राथमिकता मिलने से माल लदान और परिवहन की प्रक्रिया अधिक सुगम हो सकती है। इससे आपूर्ति शृंखला में होने वाली देरी कम करने और लॉजिस्टिक्स लागत नियंत्रित रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
रेलवे को भी मिलेगा फायदा
एलटीटीसी के तहत कंपनी रेलवे को लंबे समय तक निश्चित मात्रा में माल ढुलाई और राजस्व की प्रतिबद्धता देती है। इसके बदले रेलवे की ओर से तय शर्तों के अनुसार मालभाड़े में रियायत और वैगन की आपूर्ति में प्राथमिकता दी जाती है।
इस व्यवस्था से जहां Tata Steel को परिवहन खर्च में स्थिरता मिलेगी, वहीं रेलवे को नियमित माल ढुलाई और अतिरिक्त राजस्व हासिल करने में मदद मिलेगी।











