---Advertisement---

एमसीडी के 30 फीसद स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली हैं, कई स्कूल अतिथि शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं – अंकुश नारंग

By Muskan Thakur

Published :

Follow

Join WhatsApp

Join Now

सोशल संवाद/डेस्क : आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता व एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने भाजपा शासित एमसीडी बजट को दिल्ली की जनता के साथ धोखा बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा की स्थायी समिति के अध्यक्ष ने एमसीडी सदन में जो बजट पेश किया है, वो पूरी तरह काग़ज़ी, दिखावटी और हवा-हवाई है। वायु प्रदूषण, सफाई, कूड़ा प्रबंधन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बच्चों व स्वच्छता कर्मियों के लिए न कोई विज़न और न ठोस कोई ठोस कार्य योजना है। उन्होंने कहा कि एमसीडी की डिस्पेंसरियों पर आरोग्य मंदिर का बोर्ड लगा भाजपा वाहवाही लूट रही है। एमसीडी के अस्पताल भी बदहाल हैं। कच्चे सफाई कर्मचारियों को पक्का करने का दावा भी जुमला निकल गया। बजट में एमटीएस कर्मचारियों के लिए फूटी कौड़ी नहीं दिया गया है।

ये भी पढे : हाइड्रोजन लीक से अटका NASA का Artemis II मिशन, फरवरी की जगह अब मार्च में लॉन्च की तैयारी

मंगलवार को एमसीडी सदन में बजट पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने कहा कि यह बजट नहीं, बल्कि आंकड़ों का ऐसा जादूगरखाना है, जहां सच गायब है और केवल भ्रम दिखाया जा रहा है। जिसे भाजपा दूरदर्शिता और प्रशासनिक सुधार बता रही है, वह असल में डर का प्रोजेक्ट था। उन्होंने पूछा कि अगर यह इतना जरूरी था, तो 2017 या 2012 में जब भाजपा आराम से जीत रही थी, तब यह फैसला क्यों नहीं लिया गया?

अंकुश नारंग ने कहा कि कभी परिसीमन तो कभी नोटिफिकेशन के नाम पर नगर निगम चुनाव नहीं टाले गए, बल्कि जनता का हक टाला गया और यह सब देश के गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर हुआ। 2022 की हार के बाद वार्ड कमेटी के चुनाव में डीसी को सभापति बनाया गया और चेयरमैन बनने के बाद भी डिप्टी चेयरमैन का चुनाव डीसी से कराया गया। पार्षदों को सिर्फ शपथ लेने का शो-पीस बना दिया गया है। मेयर की कुर्सी का अपमान तब हुआ जब अतिरिक्त आयुक्त को मेयर की कुर्सी पर बैठाकर स्टैंडिंग कमेटी सदस्य का चुनाव कराया गया।

जून 2025 में पीतमपुरा के एमसीडी कम्युनिटी सेंटर के स्विमिंग पूल में 6 साल के बच्चे तक्श राठी की डूबकर हुई मौत का जिक्र करते हुए अंकुश नारंग ने कहा कि पूरे बजट में लाइफ गार्ड, सीसीटीवी, इमरजेंसी सिस्टम और सेफ्टी ऑडिट के लिए कोई फंड या समर्पित प्रावधान नहीं है, लेकिन इवेंट, बैनर, फोटो और प्रचार के लिए पैसा है। बच्चे डूब जाएं, पर भाजपा के पोस्टर सूखे नहीं रहने चाहिए, यही इनका बजट मॉडल है। हर एमसीडी स्विमिंग पूल में प्रशिक्षित लाइफगार्ड, सीसीटीवी कैमरे, इमरजेंसी रेस्क्यू सिस्टम और नियमित सेफ्टी ऑडिट के लिए सदन से ही अभी डेडिकेटेड बजट आवंटित किया जाए।

बजट के आंकड़ों पर बात करते हुए अंकुश नारंग ने बताया कि आरबीई 2025-26 में 1,48,393 लाख रुपये के मुकाबले बीई 2026-27 में 85,847 लाख रुपये का प्रावधान है, जो 42 फीसद की गिरावट है। यह पैसा कहां गया और किस मद में खर्च हुआ, इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। आय बढ़ी है, लेकिन यह प्रॉपर्टी टैक्स, पेनल्टी और छोटे व्यापारियों पर बोझ डालकर बढ़ाई गई है, जबकि एलटीईआर के तहत सरकारी विभागों से 12,000 करोड़ रुपये आज भी बकाया हैं।

स्थायी समिति अध्यक्षा के बयान पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि 2018 में भाजपा शासित एमसीडी और एलजी के नोटिफिकेशन के जरिए जनता पर यूजर चार्ज थोपा गया था। आम आदमी पार्टी ने सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष किया, तब जाकर यह चार्ज हटा।

अंकुश नारंग ने कहा कि सरकार का असली चेहरा देखना हो तो कर्मचारियों के साथ उसका व्यवहार देखना चाहिए। एमटीएस, सफाई कर्मचारी, डॉक्टर और नर्सों के 33 दिन के आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सर्दी, बारिश और धूप में दिवाली सड़कों पर मनाने वाले कर्मचारियों की मांग ‘समान काम-समान वेतन’ और नियमितीकरण थी, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला। बजट में इवेंट और प्रचार के लिए पैसा है, लेकिन एमटीएस के लिए 42 करोड़ और अन्य विभागों के एमटीएस के नियमितीकरण के लिए 40 करोड़ रुपये नहीं हैं। भाजपा द्वारा 1336 कर्मचारियों को नियमित करने की बात झूठ है क्योंकि न उन्हें वेतनमान मिला, न पेंशन और न ही सेवा सुरक्षा मिली।

अंकुश नारंग ने कहा कि आज निगम का स्वास्थ्य विभाग सबसे ज्यादा ब्रांडिंग और सबसे कम इलाज वाला विभाग बन चुका है। आरोग्य मंदिर के नाम पर रंग-रोगन की राजनीति हो रही है। 14 जनवरी को 62 डिस्पेंसरियों पर सिर्फ बोर्ड बदलकर ‘आरोग्य मंदिर’ लिख दिया गया, लेकिन स्टाफ, दवाइयां और बजट वही पुराना है। भाजपा भविष्य में भी डिस्पेंसरियों पर नाम चस्पा कर अपनी पीठ थपथपाएगी। 500 डॉक्टर और 1500 नर्सों के पद खाली हैं, फिर भी स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बताया जा रहा है। रेफरल मॉडल के तहत गरीब को घुमाया जा रहा है और प्राइवेट अस्पतालों को जनता की जेब से भुगतान हो रहा है।

अंकुश नारंग ने कहा कि भाजपा ‘गाय हमारी माता है’ का नारा लगाती है, लेकिन सच्चाई यह है कि दूध देना बंद करने पर गायों को सड़कों पर छोड़ दिया जाता है, जिससे हादसे होते हैं और जानें जाती हैं। यह सब निगम प्रशासन और भाजपा शासन की मिलीभगत से चल रही अवैध डेयरियों के कारण हो रहा है। वहीं, दिल्ली की पहचान अब लाल किले या इंडिया गेट से नहीं, बल्कि गाजीपुर, भलस्वा और ओखला के लैंडफिल पहाड़ों से हो रही है। ये तीन पहाड़ तीन प्रशासनिक असफलताएं हैं।

भाजपा के 3 करोड़ पौधे लगाने के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए अंकुश नारंग ने पूछा कि उनमें से कितने जिंदा हैं और कितनों की देखरेख हुई? सच्चाई यह है कि 30-40 फीसद माली के पद खाली हैं और एक माली पर 3-4 पार्कों की जिम्मेदारी है। भाजपा पार्क व्यवस्था में फेल हो चुकी है, इसलिए पार्कों को फिर से पीपीपी मॉडल पर आरडब्ल्यूए को सौंपा जाना चाहिए।

शिक्षा के मुद्दे पर अंकुश नारंग ने कहा कि भाजपा को पोस्टर लगाने की जल्दी होती है, शिक्षक रखने की नहीं। “आप” सरकार के बनाए स्कूलों पर भाजपा के बैनर लगाए जा रहे हैं। डीबीटी, किताबें, यूनिफॉर्म और स्कूल अपग्रेडेशन जैसी पुरानी योजनाओं पर सिर्फ नाम और फोटो बदला गया है। 30 फीसद स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली हैं और कई विषय अतिथि शिक्षकों के भरोसे हैं। स्कूलों की इमारतें जर्जर हैं, छतें टपक रही हैं, बिजली-पानी नहीं है, लेकिन स्मार्ट बोर्ड का उद्घाटन किया जा रहा है।

अंकुश नारंग ने कहा कि दिल्ली गड्ढों का शहर बन गई है। हर मानसून में सड़कें गायब हो जाती हैं और नाले उफनते हैं, लेकिन फाइलों में सब ठीक है। मेंटेनेंस के बजाय सिर्फ उद्घाटन हो रहा है, ठेकेदार बदले जा रहे हैं और भुगतान अटका हुआ है। मल्टी-लेवल कार पार्किंग पर करोड़ों खर्च होने के बाद भी उपयोग सिर्फ 20-30 फीसद है। ईवी और सोलर क्रांति कागजी है, चार्जिंग स्टेशन बंद हैं और सोलर लाइटों की बैटरियां खराब हैं, यह ‘ग्रीन बजट’ नहीं बल्कि ‘ग्रीन-वॉशिंग’ है।

अंकुश नारंग ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से कहा कि अगर वे संविधान के रक्षक और लोकतंत्र के प्रहरी हैं, तो चुनाव से डर क्यों है? चुने हुए प्रतिनिधियों से बैर क्यों है और हर संस्था पर नियंत्रण की भूख क्यों है? एलजी के कंधे से बंदूक चलाई गई और अफसरों के जरिए लोकतंत्र को कुचला गया।

अंत में अंकुश नारंग ने कहा कि यह बजट लोकतंत्र विरोधी राजनीति पर खड़ा है, कर्मचारी विरोधी है और जमीनी सच्चाई से कटा हुआ है। यह बजट प्रशासन चलाने का नहीं, बल्कि राजनीति बचाने का दस्तावेज है। यह सदन गवाह है कि दिल्ली ने देखा है कि काम कैसे होता है और झूठ कैसे बोला जाता है। आम आदमी पार्टी इस झूठ को हर गली, हर वार्ड और हर मंच पर उजागर करेगी, इसलिए यह बजट खारिज करने योग्य है।

YouTube Join Now
Facebook Join Now
Social Samvad MagazineJoin Now
---Advertisement---

संबंधित पोस्ट

Exit mobile version