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Strait of Hormuz में बढ़ा तनाव, तेल सप्लाई थमी, भारत के LPG टैंकरों की बढ़ने की तैयारी जारी

By Aditi Pandey

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Tensions escalate in the Strait of Hormuz

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सोशल संवाद/डेस्क: दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक Strait of Hormuz इन दिनों बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण चर्चा में है, जिसका असर अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान इस रणनीतिक मार्ग से कच्चे तेल की आवाजाही लगभग पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे वैश्विक बाजार में चिंता बढ़ गई है। यह मार्ग इसलिए बेहद अहम माना जाता है क्योंकि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल और बड़ी मात्रा में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) इसी रास्ते से होकर गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की बाधा का सीधा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति, शिपिंग गतिविधियों और तेल की कीमतों पर पड़ता है।

वर्तमान स्थिति ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण बनी है, जहां तेहरान की चेतावनियों के बाद जहाजों की आवाजाही पर असर पड़ा है। हालात इतने संवेदनशील हो गए हैं कि सैकड़ों जहाजों को सुरक्षा कारणों से बीच समुद्र में ही लंगर डालकर रुकना पड़ा है। शिपिंग डेटा और ट्रेड से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कई जहाजों ने अपनी गति धीमी कर दी है या रास्ते में ही ठहर गए हैं, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ रहा है। हालांकि, कुछ संकेत ऐसे भी मिल रहे हैं कि यह स्थिति लंबे समय तक नहीं रह सकती और थोड़े समय के ठहराव के बाद जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य हो सकती है।

इसी बीच, बाजार से जुड़े आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि शुक्रवार को बीते 24 घंटों के दौरान कोई भी कच्चे तेल का टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से नहीं गुजरा, जो इस मार्ग की मौजूदा स्थिति को और गंभीर बनाता है। वहीं, केप्लर (Kpler) के डेटा के अनुसार, अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आने वाला एक खाली क्रूड टैंकर 18 मार्च को अपनी दिशा बदलते हुए ईरान की ओर लौट गया, जो इस क्षेत्र में बढ़ती अनिश्चितता का संकेत है।

भारत के नजरिए से देखें तो इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक अहम अपडेट सामने आया है। भारत के दो एलपीजी टैंकर ‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’ फिलहाल संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह के पास मौजूद हैं और आगे बढ़ने की तैयारी कर रहे हैं। मरीन ट्रैफिक के शिप-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, दोनों जहाजों ने संकेत देना शुरू कर दिया है कि वे जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आगे बढ़ सकते हैं। मामले से जुड़े एक ट्रेड सूत्र के अनुसार, ये टैंकर शनिवार को रवाना हो सकते हैं, हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

कुल मिलाकर, होर्मुज स्ट्रेट में जारी तनाव ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति किस तरह कुछ चुनिंदा समुद्री मार्गों पर निर्भर है। यदि मौजूदा हालात लंबे समय तक बने रहते हैं, तो इसका असर न केवल तेल और गैस की कीमतों पर पड़ेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन पर भी व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस क्षेत्र की स्थिति पर टिकी हुई है और आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं, यह काफी हद तक भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगा।

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