‘द बंगाल फाइल्स’ रिलीज़, पल्लवी जोशी ने कहा– अतीत जानना युवा पीढ़ी के लिए ज़रूरी

सोशल संवाद/डेस्क : विवेक अग्निहोत्री के निर्देशन में बनी बहुचर्चित फिल्म ‘द बंगाल फाइल्स’ आखिरकार 5 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज़ हो गई है। फिल्म रिलीज़ से पहले ही विवादों में घिरी रही। ट्रेलर लॉन्च से लेकर बंगाल में रिलीज़ को लेकर हुई रुकावटों तक, यह फिल्म लगातार सुर्खियों में रही है। अभिनेत्री पल्लवी जोशी, जिन्होंने फिल्म में मां भारती की भूमिका निभाई है, का कहना है कि इस फिल्म का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं बल्कि युवा पीढ़ी को भारत के अतीत की सच्चाइयों से अवगत कराना है।

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“इतिहास की अनदेखी भविष्य में गलती बन सकती है”

पल्लवी जोशी का कहना है कि उन्हें उनकी फिल्मों के लिए हमेशा दर्शकों से यह प्रतिक्रिया मिली है कि उनकी कहानियों से कुछ नया सीखने को मिलता है। “लोग कहते हैं कि हमें इतिहास के वे पन्ने देखने को मिले, जिनके बारे में हमें जानकारी नहीं थी। यही वजह है कि मैंने इस फिल्म में काम करने का फैसला किया। मेरा मानना है कि युवा पीढ़ी को अपने अतीत के बारे में पता होना चाहिए। अगर उन्हें यह मालूम ही नहीं होगा कि उनके साथ क्या हुआ था, तो संभावना है कि वही गलतियां भविष्य में दोबारा दोहराई जाएं,” पल्लवी ने कहा।

“जागरूक नागरिक बनने के लिए अतीत जानना जरूरी”

पल्लवी जोशी ने आगे कहा कि यदि किसी को जीवन में सफलता और शांति चाहिए तो उसे अपने अतीत को समझना बेहद ज़रूरी है। उन्होंने कहा, “अगर आप जानेंगे ही नहीं कि मां भारती का अतीत कितना हिंसक रहा है, तो आप अपने भविष्य की दिशा तय नहीं कर पाएंगे। जब तक आपको अपने घाव का पता नहीं होगा, आप दूसरों के ज़ख्म पर मरहम भी नहीं लगा पाएंगे।”

बंगाल में रिलीज़ को लेकर विवाद

‘द बंगाल फाइल्स’ का ट्रेलर 16 अगस्त को कोलकाता में लॉन्च किया जाना था, लेकिन राजनीतिक विरोधों के चलते मेकर्स को कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा। इसके बाद पल्लवी जोशी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राष्ट्रपति को पत्र लिखकर अपील की कि फिल्म को बंगाल में रिलीज़ की अनुमति दी जाए। इस विवाद ने फिल्म की चर्चा और भी बढ़ा दी।

फिल्म की स्टारकास्ट और कहानी

फिल्म में पल्लवी जोशी के साथ अनुपम खेर, मिथुन चक्रवर्ती, दर्शन कुमार, शाश्वत चटर्जी और सिमरत कौर रंधावा जैसे दिग्गज कलाकार नजर आ रहे हैं। विवेक अग्निहोत्री की इस फिल्म का मकसद ऐतिहासिक घटनाओं को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करना है। माना जा रहा है कि यह फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ की तरह ही संवेदनशील और गहन मुद्दों को छूती है।

दर्शकों की प्रतिक्रिया पर नज़र

रिलीज़ के बाद अब सबकी नज़र इस बात पर है कि दर्शक फिल्म को किस तरह स्वीकार करते हैं। सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर बहस पहले से ही शुरू हो चुकी है। जहां कुछ लोग इसे साहसिक प्रयास बता रहे हैं, वहीं एक वर्ग इसे प्रोपेगेंडा फिल्म करार दे रहा है।

‘द बंगाल फाइल्स’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि समाज के लिए एक संदेश के रूप में पेश की गई है। पल्लवी जोशी के मुताबिक, इसका मकसद यह बताना है कि अगर हम अपने अतीत को भूल जाएंगे तो भविष्य सुरक्षित नहीं रह पाएगा। अब देखना होगा कि यह फिल्म दर्शकों के बीच कितनी गहरी छाप छोड़ पाती है।

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