सोशल संवाद / रांची : राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मरङ गोमके जयपाल सिंह मुंडा पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना, 202 में अब राज्य के कुल 50 प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को प्रत्येक वर्ष विदेश में उच्च स्तरीय शिक्षा (01 वर्षीय मास्टर्स/एम.फिल डिग्री) प्राप्त करने के लिए पूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
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पिछले दिनों मंत्रिपरिषद से स्वीकृत इस प्रस्ताव का राज्य के अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने संकल्प जारी कर दिया है। इस संशोधित योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 से लागू करने की मंजूरी दे दी है, जिस पर सालाना लगभग 50 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस योजना के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति वर्ग के अधिकतम 20, पिछड़ा वर्ग के अधिकतम 14, अनुसूचित जाति वर्ग के अधिकतम 10, अल्पसंख्यक वर्ग के अधिकतम 06 छात्र-छात्राओं को लाभ दिया जाएगा। योजना में महिला आरक्षण का भी प्रावधान किया गया है। कुल सीटों में से 30 प्रतिशत सीटें छात्राओं के लिए आरक्षित की गई हैं।
यूनाइटेड किंगडम के शीर्ष संस्थानों में मिलेगा दाखिलाः यह
योजना वर्तमान में यूनाइटेड किंगडम (यूके) और नॉर्दर्न आयरलैंड के अग्रणी विश्वविद्यालयों (जैसे ऑक्सफोर्ड, कैंब्रिज, इम्पीरियल कॉलेज लंदन) के लिए संचालित होगी। इसके अतिरिक्त, छात्र क्यूएस ग्लोबल रैंकिंग के शीर्ष 1000 विश्वविद्यालयों में भी दाखिला ले सकते हैं।
पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना में संशोधन का संकल्प जारी
चयनित छात्रों को राज्य सरकार द्वारा शिक्षण शुल्क, अनुरक्षण (मेंटेनेंस) सहित अन्य भते यथा आकस्मिकता भत्ता, वीजा शुल्क, मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम और भारत से आने-जाने का इकोनॉमी क्लास का हवाई सफर का खर्च भी सरकार उठाएगी। छात्रों का चयन आदिवासी कल्याण आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा शॉर्टलिस्टिंग और विषय-आधारित साक्षात्कार के माध्यम से मेरिट लिस्ट बनाकर किया जाएगा।









