लोकसभा में गूंजा बिहार छात्र आंदोलन का मुद्दा, लाठीचार्ज और गिरफ्तारियों पर सरकार से जवाब मांगा

By Riya Kumari

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लोकसभा में गूंजा बिहार छात्र आंदोलन का मुद्दा, लाठीचार्ज और गिरफ्तारियों पर सरकार से जवाब मांगा

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सोशल संवाद / डेस्क : बिहार में छात्रों के आंदोलन पर हुई पुलिस कार्रवाई का मामला अब संसद तक पहुंच गया है। लोकसभा में बिहार के विभिन्न शैक्षणिक और छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित लाठीचार्ज, गोलीबारी और गिरफ्तारी का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया गया। इस दौरान केंद्र और बिहार सरकार से कार्रवाई को लेकर जवाब मांगा गया तथा गिरफ्तार छात्रों और जनप्रतिनिधियों की तत्काल रिहाई की मांग की गई।

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लोकसभा में उठाए गए इस मुद्दे में कहा गया कि बिहार में शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा बल प्रयोग किया गया। साथ ही आरोप लगाया गया कि आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं पर मुकदमे दर्ज किए गए और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया।

संसद में यह भी मांग की गई कि पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष शांतनु, विधायक संदीप सौरभ और पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव सहित गिरफ्तार सभी छात्र नेताओं और जनप्रतिनिधियों को बिना शर्त तत्काल रिहा किया जाए। साथ ही उनके खिलाफ दर्ज मामलों की निष्पक्ष समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।

STF की तैनाती पर उठे सवाल

लोकसभा में यह सवाल भी उठाया गया कि छात्र आंदोलन को नियंत्रित करने के लिए विशेष कार्य बल (STF) की तैनाती क्यों की गई। वक्ताओं ने कहा कि अपने अधिकारों और शैक्षणिक मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई कई गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या छात्रों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जाना उचित है।

सरकार की कार्यशैली पर विपक्ष का हमला

संसद में सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए गए। आरोप लगाया गया कि छात्रों की मांगों पर संवाद स्थापित करने के बजाय बल प्रयोग का रास्ता अपनाया गया, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर असर पड़ता है। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर आवाज उठाने वाले युवाओं के साथ संवेदनशीलता से पेश आना चाहिए।

रिहाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी

लोकसभा में यह भी कहा गया कि यदि गिरफ्तार छात्रों, छात्र नेताओं और जनप्रतिनिधियों को जल्द रिहा नहीं किया गया तथा दर्ज मामलों की समीक्षा नहीं हुई, तो बिहार में व्यापक जन आंदोलन चलाया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि यह संघर्ष केवल छात्रों की रिहाई तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, रोजगार और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े सवालों को लेकर भी जारी रहेगा। हालांकि, इस मामले पर बिहार सरकार की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, पूरे घटनाक्रम को लेकर राज्य की राजनीति भी गर्म होती नजर आ रही है। विपक्ष लगातार पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार की ओर से मामले पर विस्तृत बयान का इंतजार किया जा रहा है।

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