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करीब तीन साल बाद भी अधूरी पड़ी रुगड़ी-पदडीह प्रधानमंत्री ग्राम सड़क, जर्जर रास्ते पर जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हजारों ग्रामीण

By Riya Kumari

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करीब तीन साल बाद भी अधूरी पड़ी रुगड़ी-पदडीह प्रधानमंत्री ग्राम सड़क, जर्जर रास्ते पर जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हजारों ग्रामीण
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सोशल संवाद / चांडिल (सरायकेला-खरसावां): चौका थाना क्षेत्र के रुगड़ी गांव से पदडीह तक बन रही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) की करीब 9.15 किलोमीटर लंबी सड़क निर्धारित समय सीमा बीतने के लगभग तीन वर्ष बाद भी अधूरी पड़ी है। सड़क निर्माण में हो रही लगातार देरी के कारण हजारों ग्रामीणों को प्रतिदिन गड्ढों, कीचड़ और उबड़-खाबड़ रास्तों से होकर जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सड़क क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाती है, लेकिन निर्माण कार्य अधूरा रहने से लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।

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ग्रामीणों के अनुसार, सड़क निर्माण कार्य की शुरुआत 28 अगस्त 2023 को हुई थी और विभाग द्वारा इसे 27 फरवरी 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। हालांकि तय समय सीमा समाप्त हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन आज भी सड़क का अधिकांश हिस्सा अधूरा पड़ा है। कई स्थानों पर सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है, जबकि कहीं-कहीं निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है।

इस सड़क का शिलान्यास 28 नवंबर 2023 को रांची सांसद संजय सेठ और ईचागढ़ विधायक सविता महतो की उपस्थिति में किया गया था। सड़क निर्माण का जिम्मा एम/एस मेगोटिया कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड (M/s Megotia Construction Pvt. Ltd.) को सौंपा गया था। हालांकि निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। सड़क का अधिकांश हिस्सा अब भी अधूरा पड़ा है, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सबसे बड़ी समस्या रूड़ी से बड़ामटांड़ के बीच नाला पर बनने वाले पुल को लेकर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल निर्माण का कार्य अब तक शुरू ही नहीं हो सका है। बरसात के दिनों में नाला उफान पर रहता है, जिससे लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार ग्रामीणों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ता है, जबकि आपात स्थिति में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है।

बारिश के मौसम में अधूरी सड़क की स्थिति और बदतर हो गई है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढों में पानी भर जाने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। दोपहिया वाहन चालकों, साइकिल सवारों और पैदल चलने वाले लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर कीचड़ और जलजमाव के कारण वाहन फंस जाते हैं, जिससे घंटों तक यातायात प्रभावित रहता है।

ग्रामीणों का कहना है कि इस अधूरी सड़क का सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों, मरीजों, गर्भवती महिलाओं और एंबुलेंस सेवा पर पड़ रहा है। बच्चों को रोजाना जान जोखिम में डालकर स्कूल जाना पड़ता है, जबकि मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में भी कठिनाई होती है। कई बार एंबुलेंस को भी खराब सड़क के कारण काफी देर तक जूझना पड़ता है।

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी महत्वपूर्ण योजना का वर्षों तक अधूरा रहना विकास कार्यों की अनदेखी को दर्शाता है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग, जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अविलंब सड़क एवं पुल निर्माण कार्य पूरा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द निर्माण कार्य पूरा नहीं कराया गया तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़क संपर्क की बात करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग दिखाई देती है। उनका मानना है कि समय पर निर्माण कार्य पूरा होने से क्षेत्र के हजारों लोगों को राहत मिलेगी और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा दैनिक आवागमन की समस्याओं का समाधान हो सकेगा।

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