सोशल संवाद/डेस्क : केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और यौन अपराधों के दोषी रहे अमेरिकी फाइनेंसर जेफरी एपस्टीन की मुलाकात से जुड़ी तस्वीरों को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और शिवसेना (यूबीटी) समेत विपक्षी दलों के नेताओं ने इन तस्वीरों को साझा करते हुए मंत्री से मुलाकात के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है।
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विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया है कि हरदीप सिंह पुरी की एपस्टीन से मुलाकात किन परिस्थितियों में हुई थी और इस दौरान क्या बातचीत हुई थी। विवाद के केंद्र में पुरी का वह बयान भी है, जिसमें उन्होंने एपस्टीन से कुछ मौकों पर पेशेवर काम के सिलसिले में मिलने की बात कही थी।
हालांकि, किसी व्यक्ति के साथ मुलाकात की तस्वीर सामने आने मात्र से किसी अपराध में संलिप्तता साबित नहीं होती। इस मामले में विपक्ष के आरोपों और मंत्री के सार्वजनिक स्पष्टीकरण को अलग-अलग समझना जरूरी है।
कांग्रेस ने हरदीप सिंह पुरी के बयान पर उठाए सवाल
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने हरदीप सिंह पुरी के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि मंत्री को एपस्टीन के साथ अपनी मुलाकातों के बारे में स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।
उन्होंने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी राजनीतिक निशाना साधा। श्रीनेत ने सवाल किया कि पुरी की एपस्टीन से मुलाकात किस संदर्भ में हुई थी और इस संबंध में पहले दिए गए बयानों को तस्वीरों के साथ किस तरह समझा जाना चाहिए।
कांग्रेस ने इस मुद्दे के जरिए केंद्र सरकार से जवाबदेही की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति की ऐसी मुलाकातों के बारे में पारदर्शिता होनी चाहिए।
महुआ मोइत्रा ने तस्वीरें साझा कर कसा तंज
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी हरदीप सिंह पुरी के पुराने वीडियो बयान का हवाला देते हुए उन पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए सवाल किया कि यदि मुलाकातें प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में हुई थीं, तो तस्वीरों में अन्य प्रतिनिधि कहां थे।
महुआ मोइत्रा की टिप्पणी के बाद यह मुद्दा सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस का विषय बन गया। विपक्षी नेताओं ने मंत्री के बयान और सामने आई तस्वीरों के संदर्भ में और स्पष्टीकरण की मांग की।
NCP और शिवसेना (UBT) ने भी मांगा जवाब
एनसीपी प्रवक्ता अनीश गवांडे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तस्वीरों को गंभीर बताते हुए हरदीप सिंह पुरी से जवाब मांगा। उन्होंने सवाल किया कि मंत्री की एपस्टीन से मुलाकात क्यों हुई थी, भले ही उस समय पुरी किसी राजनयिक या पेशेवर भूमिका में रहे हों।
वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के एक सांसद ने तस्वीर साझा करते हुए मुलाकात के उद्देश्य पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि पुरी किसके संदेश के साथ एपस्टीन से मिलने गए थे।
इस तरह कांग्रेस, टीएमसी, एनसीपी और शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और संबंधित मंत्री से स्पष्टीकरण की मांग की है।
हरदीप सिंह पुरी ने जेफरी एपस्टीन से मुलाकात पर क्या कहा था?
हरदीप सिंह पुरी ने फरवरी में दिए गए अपने बयान में कहा था कि उन्होंने जेफरी एपस्टीन से पेशेवर संदर्भ में तीन या अधिकतम चार बार मुलाकात की थी। उनके मुताबिक, ये मुलाकातें इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) के एक प्रोजेक्ट से जुड़ी थीं।
पुरी ने बताया था कि वह ‘इंडिपेंडेंट कमीशन ऑन मल्टीलेटरलिज्म’ (ICM) से संबंधित प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे। उन्होंने यह भी कहा था कि ये मुलाकातें संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत पद से इस्तीफा देने के बाद और वर्ष 2017 में केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने से पहले हुई थीं।
पुरी के अनुसार, इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट में उनके तत्कालीन प्रमुख टेर्जे रोड-लार्सन एपस्टीन को जानते थे और इसी पेशेवर संदर्भ में उनकी मुलाकातें हुई थीं।
मंत्री ने इन मुलाकातों को पेशेवर बताया था और कहा था कि उनकी बातचीत का एपस्टीन पर लगे आपराधिक आरोपों से कोई संबंध नहीं था।
कौन था जेफरी एपस्टीन?
जेफरी एपस्टीन एक अमेरिकी फाइनेंसर था, जो नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और सेक्स ट्रैफिकिंग से जुड़े गंभीर मामलों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम हुआ। उसके संपर्कों में कई प्रभावशाली कारोबारी, राजनेता और अन्य चर्चित लोग शामिल रहे थे।
एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों और संपर्कों को लेकर समय-समय पर कई देशों में राजनीतिक और सार्वजनिक बहस हुई है। हालांकि, किसी दस्तावेज में नाम आने या किसी व्यक्ति के साथ मुलाकात होने को अपने आप में अपराध का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
हरदीप सिंह पुरी-एपस्टीन विवाद में आगे क्या?
हरदीप सिंह पुरी और जेफरी एपस्टीन की मुलाकात की तस्वीरों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। विपक्षी दल मुलाकात के उद्देश्य, उसके समय और संबंधित परिस्थितियों पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि पुरी पहले ही इन मुलाकातों को पेशेवर संदर्भ से जुड़ा बता चुके हैं।
अब इस विवाद में मंत्री के बयान और विपक्ष की मांगें चर्चा के केंद्र में हैं। मामले से जुड़े आरोपों और दावों का मूल्यांकन उपलब्ध प्रमाणों तथा संबंधित पक्षों के आधिकारिक स्पष्टीकरण के आधार पर ही किया जाना चाहिए।










