सोशल संवाद / नई दिल्ली : कांग्रेस ने श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी को देशवासियों की आस्था पर गंभीर आघात बताते हुए कहा कि इससे भाजपा-आरएसएस का चाल, चरित्र और चेहरा बेनकाब हो गया है। कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मांग की कि मंदिर के संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तत्काल प्रभाव से भंग किया जाए।
यह भी पढे ; E25 Petrol Update: 25% एथेनॉल वाला पेट्रोल फिलहाल नहीं होगा लागू? जानिए सरकार ने क्यों टाला फैसला
उसकी जगह एक नया ट्रस्ट गठित किया जाए, जिसमें देश के शंकराचार्यों, धर्माचार्यों, साधु-संतों और धार्मिक प्रतिनिधियों को स्थान मिले। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुप्रीम कोर्ट के जज द्वारा हो। उन्होंने यह भी मांग की कि जैसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इलेक्टोरल बॉन्ड का डेटा सार्वजनिक करना पड़ा था, उसी तरह श्रीराम मंदिर को नकदी, सोने-चांदी और अन्य सामान के रूप में मिले पूरे चढ़ावे की सूची को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने इस मामले में चल रही जांच को लीपापोती करार देते हुए कहा कि जब श्रीराम मंदिर से जुड़े हर कार्य का पूरा श्रेय खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे बढ़कर लिया था, तो अब इस घोटाले के सामने आने पर वे अपनी जवाबदेही से क्यों बच रहे हैं? उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को देश के सामने अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की संरचना शुरुआत से ही त्रुटिपूर्ण रही है। भाजपा-आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े लोगों ने मिलकर एकतरफा तरीके से पूरे मंदिर ट्रस्ट पर अनधिकृत कब्जा कर लिया, लेकिन उसमें किसी की कोई जवाबदेही तय नहीं की गई। उन्होंने कहा कि संबंधित लोगों को चढ़ावा चोरी होने की जानकारी पहले से थी, लेकिन मामले को दबाए रखा गया।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने ट्रस्ट की हालिया बैठक में पूरे मामले को चोरी के बजाय लापरवाही बताए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि अगर यह महज लापरवाही थी, तो फिर एफआईआर दर्ज करने, एसआईटी जांच बैठाने, गिरफ्तारियां करने, इस्तीफे देने और स्वीकार करने की नौबत क्यों आई? उन्होंने कहा कि ट्रस्ट और भाजपा सरकार को इस मामले में पूरी पारदर्शिता के साथ जवाब देना चाहिए, लेकिन फिलहाल सिर्फ लीपापोती की जा रही है। उन्होंने इस मामले की एसआईटी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की।
पूर्व मुख्यमंत्री ने चढ़ावा चोरी को लेकर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष के बयान पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चोरी सामने आने के बाद कोषाध्यक्ष खुद को डमी बताते हुए कह रहे हैं कि उन्हें एसओपी की कोई जानकारी ही नहीं थी और उन्होंने किसी चेक पर हस्ताक्षर भी नहीं किए थे। गहलोत ने यह भी याद दिलाया कि शुरुआत में ही जमीन खरीद का बड़ा घोटाला सामने आया था, जब महज दो करोड़ रुपये की जमीन को ट्रस्ट ने कुछ ही मिनटों में 18 करोड़ रुपये में खरीद लिया था।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर से देश के करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था और भावनाएं जुड़ी हुई हैं, जिसे भाजपा-आरएसएस ने गहरी ठेस पहुंचाई है। लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई से मंदिर निर्माण के लिए चंदा दिया था। उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मुद्दा अब देश के हर राज्य के गांव-गांव और घर-घर तक पहुंच चुका है, लोगों में इसे लेकर भारी गुस्सा और आक्रोश है।
एक प्रश्न के जवाब में गहलोत ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान पर करारा वार करते हुए कहा कि यह उनकी गलतफहमी है कि केवल भाजपा-आरएसएस के लोगों ने ही चंदा दिया था। श्रीराम मंदिर पूरे देश की जनता का है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद निर्माण कार्य शुरू हुआ और इसके लिए कांग्रेस, सपा समर्थकों समेत देशभर के नागरिकों ने चंदा दिया था।










