सोशल संवाद / डेस्क : Kharsawan स्थित आदिवासी कला संस्कृति भवन में 8 से 10 मई 2026 तक आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन आदिवासी संस्कृति, परंपरा और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ हुआ। कार्यक्रम का आयोजन Apna Adhikar Sangathan, Adivasi Ho Samaj Mahasabha Jan Adhikar Manch और Dharti Aaba Adhikar Manch के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
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तीन जिलों के युवाओं ने लिया हिस्सा
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में Ranchi, Jamshedpur और सरायकेला-खरसावां जिले से आए लगभग 35 युवा कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आदिवासी संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति युवाओं को जागरूक करना था।
आदिवासी परंपरा और लोक संस्कृति पर विशेष चर्चा
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने आदिवासी जीवनशैली, लोकगीत, पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक विरासत की महत्ता पर विस्तार से जानकारी दी। साथ ही जल, जंगल और जमीन से जुड़े पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
विशेषज्ञों ने बताया कि आदिवासी समाज की संस्कृति और प्रकृति एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं और इन्हें बचाना पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद जरूरी है।
युवाओं को दी गई जैविक खेती और बीज संरक्षण की जानकारी
कार्यक्रम में प्रतिभागियों को:
- औषधीय पौधों की पहचान
- बीज संरक्षण
- जैविक खेती
- जल स्रोतों के पारंपरिक प्रबंधन
से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। इसके अलावा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देने पर भी चर्चा की गई।
PESA कानून और वन अधिकार अधिनियम पर विशेष सत्र
प्रशिक्षण कार्यक्रम में PESA कानून, वन अधिकार अधिनियम 2006 और ग्राम सभा की शक्तियों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। प्रतिभागियों को उनके संवैधानिक अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के प्रति जागरूक किया गया।
पर्यावरण सुरक्षा में पारंपरिक ज्ञान की अहम भूमिका
प्रशिक्षकों ने कहा कि आदिवासी समाज का पारंपरिक ज्ञान पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से पर्यावरण सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी।
कई सामाजिक कार्यकर्ता रहे मौजूद
कार्यक्रम में संतोष भाई, गोपाल भाई, वीर क्रिकेटर, नेहाल भाई, मनोज कुमार सोय सहित समाज के कई अगुवा मौजूद रहे। इस अवसर पर रामलाल हेंब्रम, नागिन सोय, डाबुआ सोय, सिद्धेश्वर कुदादा, अनीशा गागराई, आशा तीयु और सुखदेव हेंब्रम समेत बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।









