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TMC Crisis: सुखेंदु शेखर रे के इस्तीफे से ममता बनर्जी को झटका? पार्टी में बढ़ते असंतोष पर चर्चा तेज

By Tamishree Mukherjee

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Sukhendu Sekhar Ray's resignation jolts Mamata Banerjee

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सोशल संवाद / डेस्क : पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ते असंतोष की चर्चा तेज हो गई है। INDIA गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठकों और आगामी राजनीतिक रणनीतियों के बीच पार्टी को एक और झटका लगने की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे ने पार्टी और अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में नई अटकलें शुरू हो गई हैं।

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह घटनाक्रम व्यापक असंतोष का संकेत साबित होता है, तो इसका असर केवल बंगाल की राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई दे सकता है।

विधायकों के बाद सांसदों में भी असंतोष की चर्चा

हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस के कई विधायकों द्वारा पार्टी नेतृत्व के खिलाफ असंतोष जाहिर किए जाने की खबरें सामने आई थीं। अब चर्चा है कि इसी असंतोष का प्रभाव पार्टी के सांसदों के बीच भी दिखाई देने लगा है।

सुखेंदु शेखर रे ने भी हाल के बयानों में संकेत दिया था कि विधानसभा के भीतर उभरे असंतोष का असर संसदीय दल पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा था कि इतनी बड़ी संख्या में विधायकों का कम समय में अलग रुख अपनाना अभूतपूर्व है और इसके राजनीतिक परिणाम भविष्य में देखने को मिल सकते हैं।

क्या TMC के लिए सबसे बड़ा संगठनात्मक संकट?

राजनीतिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम को तृणमूल कांग्रेस के गठन के बाद सबसे बड़े आंतरिक संकटों में से एक माना जा रहा है। कुछ बागी नेताओं ने दावा किया है कि पार्टी के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से असंतोष बढ़ रहा था।

बागी खेमे से जुड़े नेताओं का आरोप है कि संगठन में कुछ नेताओं का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे पुराने कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के बीच नाराजगी पैदा हुई है। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से इन आरोपों पर अलग-अलग समय पर सफाई दी जाती रही है।

अभिषेक बनर्जी की भूमिका पर उठ रहे सवाल

राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष का एक बड़ा कारण अभिषेक बनर्जी का बढ़ता प्रभाव है। असंतुष्ट नेताओं द्वारा कथित तौर पर इस पूरे घटनाक्रम को अनौपचारिक रूप से “ऑपरेशन क्राउन प्रिंस” नाम दिया गया है।

हालांकि, पार्टी की ओर से इस तरह के दावों पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व को संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़ सकते हैं।

दिल्ली में बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

इसी बीच TMC के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के दिल्ली पहुंचने को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व ने उन्हें निर्धारित कार्यक्रम से पहले राष्ट्रीय राजधानी भेजा था। इसे पार्टी के भीतर चल रही गतिविधियों और राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।

आगे क्या?

फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह घटनाक्रम केवल कुछ नेताओं की नाराजगी तक सीमित रहेगा या फिर इसका असर तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल और संगठन पर व्यापक रूप से देखने को मिलेगा। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया और संगठनात्मक फैसले बंगाल की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।

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