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ट्रेजरी घोटाला : डीएसपी और एसपी भी जांच के घेरे में, सीएम बोले-शुरुआत से करें जांच

By Riya Kumari

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ट्रेजरी घोटाला : डीएसपी और एसपी भी जांच के घेरे में, सीएम बोले-शुरुआत से करें जांच

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सोशल संवाद / रांची : ट्रेजरी से करोड़ों रुपये की फर्जी निकासी के मामले में हजारीबाग और बोकारो में पुलिस अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है. हजारीबाग में वर्तमान में डीएसपी अमित कुमार डीडीओ का चार्ज संभाल रहे हैं, जबकि बोकारो जिले में डीएसपी अनिमेष गुप्ता यह जिम्मेदारी निभा रहे हैं. हजारीबाग में जांच के क्रम में पुलिस अधिकारियों को जानकारी मिली है

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कि यह मामला वर्ष 2014 से चल रहा था. आमतौर पर जिले में डीएसपी को एसपी डीडीओ का चार्ज दे देते हैं, लेकिन हजारीबाग जिले में बीच में एसपी भी डीडीओ का चार्ज संभाल चुके हैं. इधर ट्रेजरी घोटाले की जांच का दायरा जैसे-जैसे बढ़ रहा है, राज्य में और जगहों पर भी ऐसी गड़बड़ियों के संकेत मिलने लगे हैं. बोकारो हजारीबाग के बाद पलामू ट्रेजरी में गड़बड़ी का मामला उजागर हुआ है. पलामू में भी कुबेर पोर्टल में ज्यादा भुगतान किये जाने का शक जताया गया है.

तीन से चार ऐसे मामले पकड़े गये हैं, जिनमें ज्यादा भुगतान किया गया है. पलामू में भी पुलिसकर्मियों को ही वेतन मद में ज्यादा भुगतान करने की आशंका जतायी गयी है. मामला सामने आने के बाद विभागीय सचिव ने पलामू डीसी से रिपोर्ट मांगी है. इन सब के बीच सीएम हेमंत सोरेन ने ट्रेजरी घोटाले में दोषी पदाधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि यह मामला काफी समय से चल रहा है. शुरुआत से ही इसकी जांच करायी जाये और जो भी दोषी मिलते हैं, उन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाये.

पलामू डीसी से भी वित्त सचिव ने मांगी ट्रेजरी की रिपोर्ट : बोकारो – हजारीबाग के बाद पलामू ट्रेजरी में गड़बड़ी का मामला उजागर हुआ है. मामले में प्रभात खबर ने पलामू के ट्रेजरी अफसर सोमरा भगत से बात की, तो उन्होंने कहा कि वित्त विभाग की चिट्ठी आयी थी, इसके बाद जांच करायी गयी, लेकिन कोई गड़बड़ी नहीं हुई है.

 इधर, वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने विभागीय सचिव को निर्देश दिया है कि राज्य के सभी जिलों में व्यापक जांच करायी जाये. गृह सचिव व पुलिस महानिदेशक को सूचित करें कि हर जिले में एकाउंटेंट कितने वर्षों से पदस्थापित हैं. वित्त मंत्री के पत्र में कहा गया है कि यह संभव है कि इस अवैध निकासी का मामला राज्य के अन्य जिलों में भी हो, जिससे इंकार नहीं किया जा सकता है. इसके पीछे सुनियोजित आपराधिक नीयत से कोई सिंडिकेट काम कर रहा हो. पूरे मामले में निकासी व व्ययन पदाधिकारी डीडीओ की जवाबदेही भी सुनिश्चित हो.

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