सोशल संवाद / डेस्क : केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक घोषणा की है। उन्होंने बताया कि उत्तर भारत में मानसिक स्वास्थ्य के लिए कोई समर्पित राष्ट्रीय स्तर का संस्थान नहीं है। इसी कमी को दूर करने के लिए सरकार ने NIMHANS-2 (निमहांस-2) की स्थापना का फैसला लिया है। इसके लिए झारखंड की राजधानी रांची और असम के तेजपुर को चुना गया है।
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इस फैसले से न सिर्फ मानसिक रोगों के इलाज को मजबूती मिलेगी, बल्कि रिसर्च और मेडिकल एजुकेशन को भी नई दिशा मिलेगी।
मानसिक स्वास्थ्य का हब है रांची
Ranchi Mental Health Institutes
रांची पहले से ही देश के प्रमुख मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों में गिना जाता है। यहां दो प्रतिष्ठित संस्थान पहले से कार्यरत हैं
- Central Institute of Psychiatry (CIP), कांके
- Ranchi Institute of Neuro-Psychiatry and Allied Sciences (RINPAS)
दोनों संस्थान कांके क्षेत्र में स्थित हैं और दशकों से मानसिक रोगों के इलाज, शोध और प्रशिक्षण में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
सीआईपी कांके: 100 साल से ज्यादा पुराना संस्थान
Central Institute of Psychiatry History
सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री (CIP) की स्थापना 17 मई 1918 को हुई थी। पहले इसे Ranchi European Lunatic Asylum के नाम से जाना जाता था। करीब 211 एकड़ में फैला यह संस्थान एशिया के सबसे बड़े मानसिक स्वास्थ्य अस्पतालों में शामिल है।
CIP की खास बातें:
- 643 बेड की क्षमता वाला ओपन हॉस्पिटल
- मनोरोग, क्लिनिकल साइकोलॉजी और सोशल वर्क में पीजी ट्रेनिंग
- 24×7 इमरजेंसी सेवा और ओपीडी
- टेलीफोनिक हेल्पलाइन की सुविधा
यहां मरीजों को बंद वार्ड में नहीं रखा जाता, जिससे इलाज ज्यादा मानवीय और प्रभावी होता है।
RINPAS: मानसिक पुनर्वास में अग्रणी
RINPAS Ranchi History
RINPAS का इतिहास भी बेहद समृद्ध है। इसकी शुरुआत 1795 में मुंगेर मानसिक अस्पताल के रूप में हुई थी, जिसे बाद में 1925 में रांची स्थानांतरित किया गया। यह अंग्रेजों द्वारा भारतीय मरीजों के लिए स्थापित पहला मानसिक अस्पताल माना जाता है।
यह संस्थान खासतौर पर:
- मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास
- सामुदायिक आउटरीच
- मेडिकल एजुकेशन और ट्रेनिंग
पर फोकस करता है।
गरीबों के लिए वरदान है CIP कांके
Low Cost Mental Health Treatment in India
CIP कांके को गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए सबसे बड़ा सहारा माना जाता है। यहां इलाज की लागत बेहद कम है—
- दो महीने का इलाज: मात्र ₹600
- इसमें रहना, खाना, कपड़े और दवाइयां शामिल
- डॉक्टर की फीस आज भी सिर्फ ₹10
इसी वजह से इसे “गरीबों का मानसिक अस्पताल” भी कहा जाता है।
देशभर से इलाज के लिए आते हैं मरीज
Patients from Across India
CIP रांची में झारखंड के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।
यहां दवाओं के साथ-साथ:
- साइकोथेरेपी
- योग
- इनडोर और आउटडोर खेलकूद
जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं, जिससे मरीजों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों पर काम किया जाता है।
निमहांस-2 से झारखंड को मिलेगा राष्ट्रीय दर्जा
NIMHANS-2 Impact on Jharkhand
निमहांस-2 की स्थापना से रांची को मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की उम्मीद है। इससे झारखंड न केवल इलाज का केंद्र बनेगा, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य रिसर्च और मेडिकल एजुकेशन में भी अग्रणी भूमिका निभाएगा।










