सोशल संवाद / डेस्क : ईरान को लेकर अमेरिका ने अपना आर्थिक दबाव और तेज कर दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि वॉशिंगटन ईरान पर अब तक के सबसे कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है। अमेरिका का लक्ष्य ईरान की अर्थव्यवस्था को अलग-थलग करना और तेहरान पर दबाव बढ़ाना है।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन देशों को भी आर्थिक परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है, जो ईरान के साथ व्यापार या किसी तरह का आर्थिक सहयोग जारी रखते हैं। इसके बाद अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों के साथ-साथ चीन से भी ईरान के साथ आर्थिक संबंध सीमित करने की अपील की है।
चीन पर भी बढ़ा दबाव
ईरान के लिए चीन सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदारों में से एक है और वहां से बड़ी मात्रा में ईरानी तेल खरीदा जाता है। अमेरिकी दबाव के बीच चीनी खरीदारों को ईरानी तेल की सप्लाई में भी कमी का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के तेल निर्यात में तेज गिरावट आई है और चीन के कुछ रिफाइनर अब ब्राजील और इराक जैसे देशों से कच्चा तेल लेने के विकल्प तलाश रहे हैं।
अमेरिका का कहना है कि आर्थिक दबाव के जरिए ईरान पर सैन्य कार्रवाई की जरूरत को कम किया जा सकता है। वहीं ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों को खारिज करते हुए इसे आर्थिक आतंकवाद बताया है और चेतावनी दी है कि नए अमेरिकी कदमों का जवाब दिया जाएगा।
तेल बाजार पर भी असर
अमेरिका-ईरान तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। मध्य पूर्व से तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में दबाव बना हुआ है। इससे आने वाले दिनों में दुनिया के कई देशों में महंगाई और ऊर्जा लागत को लेकर चिंता बढ़ सकती है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि चीन और दूसरे प्रमुख व्यापारिक साझेदार अमेरिका के बढ़ते दबाव के सामने ईरान के साथ अपने आर्थिक रिश्तों को किस हद तक सीमित करते हैं। इससे अमेरिका-चीन संबंधों और पूरे मध्य पूर्व की भू-राजनीति पर भी असर पड़ने की संभावना है।









