सोशल संवाद / चक्रधरपुर: पश्चिमी सिंहभूम जिले के गोइलकेरा प्रखंड स्थित बिला पंचायत के ग्रामीणों ने जल-नल योजना में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के विरोध में बुधवार को पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल, चक्रधरपुर कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। आंदोलन का नेतृत्व दिनेश बोईपाई ने किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और योजना की जांच की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी की।
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ग्रामीणों का आरोप है कि बिला पंचायत में संचालित जल-नल योजना की कुल लागत 58.92 करोड़ रुपये है, जिसमें से अब तक लगभग 57.25 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद पंचायत के कई गांवों में लोगों को नियमित और शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी योजना का लाभ आम जनता तक नहीं पहुंचना गंभीर सवाल खड़े करता है।

ग्रामीणों ने उठाए कई अहम सवाल
धरना-प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने योजना के क्रियान्वयन और खर्च को लेकर कई सवाल उठाए। उनका कहना था कि जब अधिकांश राशि खर्च हो चुकी है तो आज भी ग्रामीणों को पेयजल के लिए परेशान क्यों होना पड़ रहा है।
ग्रामीणों के प्रमुख सवाल :
- 57.25 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद पानी की आपूर्ति क्यों नहीं हो रही?
- योजना की वर्तमान स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है?
- किन मानकों के आधार पर इतनी बड़ी राशि का भुगतान किया गया?
- पंचायत के सभी घरों तक नियमित पेयजल कब पहुंचेगा?

स्वतंत्र जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की कि जल-नल योजना की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही अब तक हुए खर्च का पूरा ब्योरा सार्वजनिक किया जाए ताकि लोगों को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि यदि जांच में किसी अधिकारी, एजेंसी या ठेकेदार की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उनका कहना है कि जनता आज भी पानी जैसी बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष कर रही है, जबकि सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
धरना के दौरान ग्रामीणों ने नारे लगाए
“58.92 करोड़ की जल-नल योजना, फिर भी जनता प्यासा क्यों?”
“57.25 करोड़ खर्च, पानी गायब जवाब दो या हिसाब दो!”
ग्रामीणों का कहना है कि अब वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि पेयजल योजना की वास्तविक स्थिति और जवाबदेही चाहते हैं।










