सोशल संवाद/डेस्क: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राज्य की वर्तमान सरकार ने विधानसभा में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की चार वर्षों से लंबित 28 ऑडिट रिपोर्टें पेश की हैं। इन रिपोर्टों में अम्फान चक्रवात राहत वितरण, स्वास्थ्य साथी योजना, समग्र शिक्षा मिशन, शहरी निकायों और अन्य सरकारी योजनाओं में वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। सरकार ने इन रिपोर्टों पर विस्तृत चर्चा के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की घोषणा भी की है।
विधानसभा में पेश की गईं चार साल से लंबित रिपोर्टें
वर्तमान सरकार का आरोप है कि पिछली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार ने संवैधानिक दायित्व का पालन नहीं करते हुए इन CAG रिपोर्टों को विधानसभा में प्रस्तुत नहीं किया। अब इन्हें सदन के पटल पर रखकर विस्तृत चर्चा कराने का फैसला लिया गया है। सरकार का कहना है कि इन रिपोर्टों के अध्ययन से राज्य की वित्तीय स्थिति और बढ़ते कर्ज के कारणों को समझने में मदद मिलेगी।
अम्फान राहत वितरण में गंभीर अनियमितताओं का दावा
CAG रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 में आए अम्फान चक्रवात के बाद राहत एवं पुनर्वास कार्यों में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि:
- नुकसान का आकलन वास्तविकता से अधिक दिखाया गया।
- कई लाभार्थियों को एक से अधिक बार राहत राशि दी गई।
- कुछ मामलों में पुराने लाभार्थी डेटा के आधार पर सहायता वितरित की गई।
- जिलावार नुकसान का पूरा रिकॉर्ड ऑडिट के दौरान उपलब्ध नहीं कराया गया।
राहत राशि के भुगतान में मिली विसंगतियां
ऑडिट रिपोर्ट में मकान निर्माण सहायता के वितरण में भी कई विसंगतियों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 9,226 लाभार्थियों के बैंक खातों में राहत राशि एक से अधिक बार भेजी गई, जिसकी कुल राशि ₹18.07 करोड़ बताई गई है।
इसके अलावा, कई जिलों में लाभार्थियों के बैंक खाते और भुगतान रिकॉर्ड में अंतर पाया गया। रिपोर्ट के अनुसार, 1,44,175 लेनदेन, जिनकी कुल राशि ₹125.07 करोड़ थी, उनमें रिकॉर्ड संबंधी विसंगतियां दर्ज की गईं।
केंद्र से मांगी गई थी ₹35,018 करोड़ की सहायता
अम्फान चक्रवात के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (NDRF) से ₹35,018 करोड़ की सहायता मांगी थी। इसके मुकाबले केंद्र सरकार ने ₹2,707.77 करोड़ की सहायता की सिफारिश की थी। CAG ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि नुकसान के आकलन के समर्थन में पर्याप्त दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए, जिससे दावों की पुष्टि नहीं हो सकी।
विशेष सत्र में होगी रिपोर्टों पर चर्चा
राज्य सरकार ने घोषणा की है कि विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर इन सभी रिपोर्टों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। सरकार का कहना है कि ऑडिट रिपोर्टों में उठाए गए मुद्दों की समीक्षा की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई पर विचार होगा।









