सोशल संवाद / डेस्क : झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक Shibu Soren को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में शामिल ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें सार्वजनिक जीवन में उनके लंबे योगदान, आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए किए गए संघर्ष और अलग झारखंड राज्य के गठन में निभाई गई ऐतिहासिक भूमिका के लिए प्रदान किया गया।
‘दिशोम गुरु’ के नाम से प्रसिद्ध शिबू सोरेन ने दशकों तक जल, जंगल और जमीन की लड़ाई को आवाज दी। उन्होंने आदिवासी समुदाय के हक, पहचान और अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर लगातार आंदोलन चलाया। उनके नेतृत्व में चले आंदोलन और राजनीतिक संघर्ष का ही परिणाम था कि वर्ष 2000 में बिहार से अलग होकर झारखंड एक नए राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।
शिबू सोरेन का राजनीतिक सफर
शिबू सोरेन ने अपना पहला लोकसभा चुनाव वर्ष 1977 में लड़ा था, हालांकि उन्हें उस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और जमीनी स्तर पर लोगों के बीच काम करते रहे। इसके बाद वर्ष 1980 में दुमका लोकसभा सीट से जीत हासिल कर उन्होंने संसद में कदम रखा।
इसके बाद उनका राजनीतिक सफर लगातार आगे बढ़ता गया। वे कई बार लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य रहे। साथ ही वे झारखंड के मुख्यमंत्री भी बने और केंद्र की Manmohan Singh सरकार में केंद्रीय मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली।
राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव आने के बावजूद शिबू सोरेन हमेशा आदिवासी समाज, झारखंड के हितों और क्षेत्रीय पहचान के मुद्दों पर मजबूती से खड़े रहे। यही वजह है कि आज भी झारखंड की राजनीति में उनका नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है।
131 हस्तियों को मिला पद्म सम्मान
केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले यानी 25 जनवरी 2026 को 131 पद्म पुरस्कार विजेताओं के नामों की घोषणा की थी। पहले चरण में देश की 66 हस्तियों को सम्मानित किया गया, जबकि बाकी विजेताओं को दूसरे चरण में सम्मान प्रदान किया जाएगा।










