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खुले में मांस का प्रदर्शन होगा बंद? -अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू

By Tamishree Mukherjee

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Will the display of meat in the open be stopped? – Advocate Sudhir

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सोशल संवाद / जमशेदपुर : सड़क किनारे मांस बेचने पर सुप्रीम कोर्ट का कोई एक राष्ट्रव्यापी पूर्ण प्रतिबंध का आदेश नहीं है बल्कि अदालत ने FSSAI के खाद्य सुरक्षा मानकों , खुले में मांस काटने पर रोक और बिना लाइसेंस वाली अवैध दुकानों को बंद करने के निर्देश दिए हैं स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार इन्हीं गाइडलाइंस का पालन करती है लाइसेंस अनिवार्य खुले में प्रदर्शन पर रोक स्वच्छता और अपशिष्ट निपटान( मांस का अपशिष्ट कचरा खुले हुए फेंकने के बजाय उचित तरीके से नष्ट करना अनिवार्य है नहीं करने पर सड़क पर आवारा कुत्तों को मांस का टुकड़ा मिलने एवं नहीं मिलने पर आम जनता और छोटे बच्चों पर जानलेवा हमला करने को देखा जाता है।

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FSSAI के नियम भी स्पष्ट दर्शाता है कि सार्वजनिक स्थानों पर खुले में मांस और पशुओं के शव लटकाकर बेचने की प्रथा पर मेघालय हाईकोर्ट के समझ 26-5- 2023 को जनहित याचिका 2/21 दाखिल में गो ज्ञान फाउंडेशन बनाम मेघालय राज्य की सुनवाई में कड़ी आपत्ति जताते हुए मेघालय राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि मांस की दुकानों में पशुओं के शवों का सार्वजनिक प्रदर्शन पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए। अदालत ने कहा कि मांस को केवल रेफ्रिजरेटर, बंद कंटेनर या दुकान के अंदर इस प्रकार रखा जाए कि वह बाहर से दिखाई न दे।

कोर्ट ने माना कि खुले में लटके पशुओं के शव न केवल देखने में भयावह होते हैं, बल्कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं और समाज में असहजता का वातावरण पैदा करते हैं। साथ ही, खुले में रखा मांस धूल, मक्खियों, धुएं और अन्य प्रदूषकों के संपर्क में आने से दूषित हो सकता है, जिससे खाद्य जनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के स्वच्छता मानकों के अनुसार भी मांस को प्रदूषण से सुरक्षित रखना और स्वच्छ परिस्थितियों में संग्रहित व प्रदर्शित करना अनिवार्य है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पशुओं के मानवीय व्यवहार, उनके परिवहन और खाद्य सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

यह फैसला केवल स्वच्छता या सौंदर्य का नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य, बच्चों के मनोवैज्ञानिक संरक्षण, खाद्य सुरक्षा और पशु कल्याण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। झारखंड सरकार को भी इस पर अभिलंब संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन को निर्देश देते हुए करवाई करनी चाहिए

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