सोशल संवाद / डेस्क : झारखंड में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से करीब 104 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया महिला इंजीनियरिंग कॉलेज, गोला (रामगढ़) आज भी अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर सका है। निर्माण पूरा होने के वर्षों बाद भी कॉलेज में नियमित शैक्षणिक गतिविधियां शुरू नहीं हो पाई हैं, जिससे करोड़ों रुपये की सरकारी परियोजना बेकार पड़ी है।
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2016 में रखी गई थी आधारशिला
इस कॉलेज की आधारशिला वर्ष 2016 में रखी गई थी। उस समय इसे झारखंड का पहला सरकारी महिला इंजीनियरिंग कॉलेज बताया गया था। लगभग 104.37 करोड़ रुपये की लागत से शैक्षणिक भवन, प्रशासनिक भवन, छात्रावास और अन्य आधुनिक सुविधाओं का निर्माण कराया गया था।
करोड़ों का कैंपस, लेकिन पढ़ाई नहीं
कॉलेज का विशाल परिसर, कक्षाएं, लैब और छात्रावास तैयार हैं, लेकिन नियमित प्रवेश और पढ़ाई शुरू नहीं होने से पूरा परिसर लगभग खाली पड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर संचालन शुरू होता तो राज्य की हजारों छात्राओं को इंजीनियरिंग शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ता।
सरकार से उठ रहे सवाल
इतनी बड़ी लागत से तैयार परियोजना के वर्षों तक बंद रहने पर सरकार और संबंधित विभागों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कॉलेज को जल्द शुरू नहीं किया गया तो भवन और संसाधनों के रखरखाव पर भी अतिरिक्त खर्च बढ़ता जाएगा।
छात्राओं को होगा बड़ा फायदा
कॉलेज के शुरू होने से झारखंड की छात्राओं को राज्य में ही गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा मिलेगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और शिक्षा के नए अवसर भी विकसित होंगे। इसलिए लंबे समय से इस संस्थान को पूरी तरह चालू करने की मांग की जा रही है।










