सोशल संवाद/डेस्क : महाराष्ट्र में जल संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने 16 अक्टूबर 2026 से कम से कम 10% पानी की कटौती लागू करने का फैसला किया है। यह कटौती नगर निगमों, नगर परिषदों और ग्राम पंचायतों समेत शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों में लागू होगी। सरकार ने यह कदम कम बारिश, सीमित जल भंडार और अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए उठाया है।
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31 अगस्त 2027 तक की बनाई योजना
महाराष्ट्र के जल संसाधन विभाग ने उपलब्ध पानी के इस्तेमाल के लिए 31 अगस्त 2027 तक की विस्तृत योजना तैयार की है। इसके तहत बांधों में 10% अतिरिक्त पानी आपातकालीन रिजर्व के तौर पर रखा जाएगा। पीने के पानी को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाएगी।
265 तालुकों में सूखे की स्थिति
राज्य सरकार ने सितंबर में महाराष्ट्र के 358 में से 265 तालुकों में सूखा घोषित किया था। सरकार का कहना है कि कम बारिश और आने वाले समय में जल संकट की आशंका को देखते हुए पानी का इस्तेमाल बेहद सावधानी से करना जरूरी है।
उद्योगों को 30% पानी रिसाइकिल करना होगा
सरकार ने उद्योगों को अपने इस्तेमाल किए गए पानी का कम से कम 30% दोबारा इस्तेमाल या रिसाइकिल करने का निर्देश दिया है। स्थानीय निकायों को पानी की लीकेज रोकने और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को पूरी क्षमता से चलाने के लिए भी कहा गया है। ट्रीट किए गए पानी का इस्तेमाल बागवानी, निर्माण और सफाई जैसे कामों में किया जाएगा।
सिंचाई से पहले पीने के पानी को प्राथमिकता
सरकार के अनुसार सिंचाई के लिए पानी तभी जारी किया जाएगा, जब पीने के पानी, पशुओं और चारे की जरूरत पूरी हो जाए। रबी की खाद्यान्न और चारा फसलों को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं, पानी की उपलब्धता होने पर ही बारहमासी फसलों के लिए सिंचाई की अनुमति होगी।
अवैध पानी निकासी पर होगी कार्रवाई
जल संसाधन, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीमें बांधों, नदियों और नहरों से अवैध रूप से पानी निकालने वालों पर नजर रखेंगी। अवैध पंप और अन्य उपकरण जब्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार ने लोगों से पानी की हर बूंद का सावधानी से इस्तेमाल करने की अपील की है।











