पश्चिमी सिंहभूम के 12 बधिर विद्यार्थियों को मिला शिक्षा का नया रास्ता, Jamshedpur के CBV में दाखिला

By Riya Kumari

Published :

Follow
पश्चिमी सिंहभूम के 12 बधिर विद्यार्थियों को मिला शिक्षा का नया रास्ता, Jamshedpur के CBV में दाखिला

Join WhatsApp

Join Now

सोशल संवाद / डेस्क : टाटा स्टील फाउंडेशन की दिव्यांगता समावेशन पहल ‘सबल’ के जरिए पश्चिमी सिंहभूम के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के 12 बधिर विद्यार्थियों के लिए शिक्षा की नई राह खुली है। फाउंडेशन ने इन विद्यार्थियों के जमशेदपुर स्थित कार्मेल बाल विहार (CBV) में दाखिले और आवासीय सुविधा की व्यवस्था की है। यह पहल JCAPCPL समर्थित बधिर समावेशन परियोजना के तहत की गई है।

यह भी पढे : TMH में नई Heart Care Unit शुरू, अत्याधुनिक Cardiac Catheterization Laboratory से बढ़ी इलाज की क्षमता

पहली बार सबल के तहत हुई ऐसी पहल

यह सबल कार्यक्रम के तहत इस तरह की पहली पहल है। इसका उद्देश्य ग्रामीण और जनजातीय समुदायों से आने वाले बधिर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, संचार सहयोग और बेहतर सीखने का वातावरण उपलब्ध कराना है, ताकि उनकी पढ़ाई में आने वाली बाधाओं को कम किया जा सके।

टाटा स्टील फाउंडेशन की ‘सबल’ पहल दिव्यांगजनों के लिए शिक्षा, सुगम्यता, आजीविका, सहायक सेवाओं और सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देने पर काम करती है। इसके तहत भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) प्रशिक्षण, डिजिटल साक्षरता, कौशल विकास और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं।

आर्थिक चुनौतियों के बीच पढ़ाई का सपना

चयनित 12 विद्यार्थी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। सुनने और बोलने संबंधी दिव्यांगता के कारण इनमें से कई बच्चों को औपचारिक शिक्षा हासिल करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। सबल से जुड़े कई विद्यार्थियों ने पहले ISL, कंप्यूटर शिक्षा और अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा लिया है।

अब कार्मेल बाल विहार में दाखिले के बाद उन्हें औपचारिक स्कूली शिक्षा के साथ आवासीय सुविधा, संचार सहयोग और समग्र विकास के अवसर मिलेंगे। इससे उनके शैक्षणिक विकास, आत्मनिर्भरता और भविष्य में रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

14 वर्षीय सोनाराम ने ISL और कंप्यूटर से सीखा

कुटीनाटा गांव के 14 वर्षीय सोनाराम तिरिया को सुनने और बोलने संबंधी 88 प्रतिशत दिव्यांगता है। किसान परिवार से आने वाले सोनाराम वर्ष 2022 से सबल से जुड़े हैं। उन्होंने ISL और कंप्यूटर प्रशिक्षण के जरिए संचार और डिजिटल कौशल विकसित किया है।

कार्मेल बाल विहार में दाखिला उनके लिए बेहतर शिक्षा और भविष्य में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सूरज मुंडा की कहानी भी प्रेरणादायक

सूरज मुंडा जन्म से ही गंभीर श्रवण दिव्यांगता के साथ जीवन की शुरुआत करने वाले विद्यार्थियों में शामिल हैं। माता-पिता की देखभाल से अलग होने के बाद उन्हें कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उन्हें ऐसी स्थिति से भी बचाया गया, जहां उन्हें भीख मांगने के लिए मजबूर किया गया था।

बाल संरक्षण व्यवस्था की मदद और बाद में टाटा स्टील फाउंडेशन की दिव्यांगता समावेशन पहल से जुड़ने के बाद सूरज ने मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद अपनी शिक्षा जारी रखी।

पिता को खोने के बाद मां ने संभाला रामसिंह का परिवार

जगन्नाथपुर प्रखंड के 12 वर्षीय रामसिंह हेस्सा 100 प्रतिशत सुनने और बोलने संबंधी दिव्यांगता के साथ जीवन जी रहे हैं। कम उम्र में ही उन्होंने अपने पिता को खो दिया। इसके बाद उनकी मां ने सब्जी की खेती और कृषि कार्य के जरिए परिवार की जिम्मेदारी संभाली।

आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद रामसिंह ने पढ़ाई जारी रखी। सबल के ISL और कंप्यूटर प्रशिक्षण से उनके आत्मविश्वास और संवाद कौशल में सुधार हुआ। इसके बाद उनका चयन कार्मेल बाल विहार के लिए किया गया।

कृष्णा चाम्पिया को भी मिला बेहतर शिक्षा का अवसर

नोआमुंडी प्रखंड के 13 वर्षीय कृष्णा चाम्पिया को 92 प्रतिशत से अधिक श्रवण संबंधी दिव्यांगता है। दिहाड़ी मजदूर परिवार से आने वाले कृष्णा को मुख्यधारा के स्कूल में पढ़ाई के दौरान संवाद संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और सबल के ISL, कंप्यूटर तथा क्ले आर्ट प्रशिक्षण में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। अब कार्मेल बाल विहार में उनका दाखिला परिवार के लिए बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर आया है।

‘सही सहयोग मिले तो बच्चे बेहतर कर सकते हैं’

कार्मेल बाल विहार की प्राचार्या सिस्टर अमिका ए.सी. ने कहा, “शिक्षा सफलता की कुंजी है। सही सहयोग और समर्थन मिलने पर सुनने में अक्षम व्यक्ति शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं और आजीविका के बेहतर अवसरों तक उनकी पहुंच सुनिश्चित हो सकती है।”

वहीं, स्किल डेवलपमेंट, डिसेबिलिटी एंड स्पोर्ट्स के हेड कैप्टन अमिताभ ने कहा कि शिक्षा में जीवन बदलने की शक्ति है और हर बच्चे को सीखने, आगे बढ़ने तथा अपनी क्षमताओं को विकसित करने का समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस पहल के जरिए वंचित समुदायों के सुनने में असमर्थ बच्चों को आवश्यक सहयोग और अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

दिव्यांगता को शिक्षा की राह में बाधा नहीं बनने देने की पहल

पश्चिमी सिंहभूम के दूरदराज के आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले इन 12 बच्चों ने आर्थिक कठिनाइयों, संवाद संबंधी समस्याओं और सीमित शैक्षणिक सुविधाओं के बावजूद आगे बढ़ने की कोशिश की है।

टाटा स्टील फाउंडेशन की ‘सबल’ पहल के तहत कार्मेल बाल विहार में उनका दाखिला इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, ताकि दिव्यांगता उनकी शिक्षा और भविष्य के अवसरों में बाधा न बने।

YouTube Join Now
Facebook Join Now
Social Samvad MagazineJoin Now
---Advertisement---