सोशल संवाद/डेस्क: प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत आवेदनों की जांच में एआई तकनीक के इस्तेमाल से करीब 42 हजार अपात्र आवेदक चिन्हित किए गए हैं, जो खुद को बेघर बताकर सूची में शामिल हो गए थे।
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पिछले वर्ष से योजना में सेल्फ सर्वे की सुविधा शुरू की गई थी। आवेदकों ने मोबाइल एप के जरिए अपने घर की तस्वीर और विवरण स्वयं अपलोड किया। कुल 1,64,953 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी शामिल थे जिनके पास पहले से पक्के मकान मौजूद थे।
पोर्टल पर एआई आधारित सत्यापन के दौरान 23 ब्लॉकों के 61,566 आवेदन संदिग्ध पाए गए। ब्लॉक स्तर पर जांच के बाद करीब 42 हजार मामलों में गड़बड़ी सामने आई। अब इन नामों को सूची से हटाने की प्रक्रिया चल रही है।
अधिकारियों के अनुसार, जिन तस्वीरों में पक्की दीवार या छत दिखाई दी, उन्हें एआई ने स्वतः चिन्हित कर लिया। जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक भूपेंद्र सिंह ने पुष्टि की है कि सत्यापन पूरा हो चुका है और अपात्रों के नाम हटाए जा रहे हैं। सरकार का दावा है कि तकनीक के सहारे योजना का लाभ सही जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाएगा।










