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इस दिन है निर्जला एकादशी…जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

By admin

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सोशल संवाद/डेस्क :  इसे हिंदू धर्म में सबसे शुभ अवसरों में से एक माना जाता है. यह न केवल भारत में बल्कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में अत्यधिक महत्व रखता है. निर्जला एकादशी आमतौर पर ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की 11वीं तिथि को मनाई जाती है. यह एक शुभ दिन है जिस दिन देश भर के लोग देवता का आशीर्वाद लेने के लिए उपवास रखते हैं

तिथि और शुभ मुहूर्त

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इस साल देशभर में निर्जला एकादशी 31 मई को मनाई जाएगी. द्रिक पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 30 मई को शाम 05:37 बजे शुरू होगी और 31 मई 2023 को शाम 06:15 बजे समाप्त होगी.

  • 1 जून को पारण का समय – 06:51 AM से 08:52 AM तक
  • पारण के दिन द्वादशी समाप्ति मुहूर्त – 06:09 PM

निर्जला एकादशी का महत्व

निर्जला एकादशी को एक वर्ष के भीतर मनाई जाने वाली सभी चौबीस एकादशियों में से सबसे महत्वपूर्ण और महत्वपूर्ण एकादशी के रूप में जाना जाता है. निर्जला का अर्थ है बिना पानी के उपवास करना और पूरे दिन किसी भी प्रकार के खाद्य पदार्थ का सेवन न करना. निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है.

निर्जला एकादशी कथा

निर्जला एकादशी से जुड़ी एक पौराणिक कथा के कारण इसे पांडव एकादशी, भीमसेनी एकादशी या भीम एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. दूसरे पांडव भाई, भीमसेन, अपनी भूख को नियंत्रित करने में असमर्थ थे और एकादशी व्रत का पालन करने में विफल रहे. भीम और द्रौपदी के अलावा सभी पांडव भाई एकादशी का व्रत रखते थे.

भीम अपनी इच्छाशक्ति की कमी और भगवान विष्णु का अनादर करने का समाधान खोजने के प्रयास में महर्षि व्यास से मिले. एक वर्ष में सभी एकादशियों का व्रत न करने की भरपाई के लिए, ऋषि व्यास ने भीम को एक निर्जला एकादशी का पालन करने की सलाह दी, यही कारण है कि निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी के नाम से भी जाना जाता है.

पूजा विधि

निर्जला एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें और अपने ऊपर गंगाजल का छिड़काव करें. पवित्र मंत्रों का जाप करते हुए सूर्य देव को जल अर्पित करें. भगवान विष्णु को फूल, फल, अक्षत, चंदन और दूर्वा घास अर्पित करें. ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम:’ का जाप करें. निर्जला एकादशी व्रत कथा पढ़ें और आरती करें. लड्डू, गुझिया जैसी मिठाई का भोग लगाएं और देवता को भोग लगाने के बाद इसे गरीबों और जरूरतमंदों में बांट दें.

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