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संसद से पास हुआ ‘G Ram G’: मनरेगा का नाम बदला या पूरा सिस्टम?

By Muskan Thakur

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सोशल संवाद/डेस्क : संसद से जी राम जी बिल पास हो गया। विपक्ष के सांसदों ने इसका जमकर विरोध भी किया। ये लोग विधेयक के नाम को लेकर नाराज थे। दरअसल बिल में महात्मा गांधी के नाम की जगह भगवान राम का नाम लिया गया है। विपक्ष का ये भी आरोप था कि यह बिल गांव के गरीबों के लिए रोजगार की गारंटी को खत्म करता है।

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विपक्ष ने एक बदले हुए फंडिंग स्ट्रक्चर का भी विरोध किया, जिसके तहत ज्यादातर राज्यों को एक जरूरी सोशल वेलफेयर स्कीम के तहत मजदूरी का 40 प्रतिशत देना होगा। विपक्ष ने तर्क दिया कि यह शर्त ज्यादातर राज्यों में इस स्कीम को कमजोर करती है, क्योंकि ज्यादातर राज्यों के पास अनुमानित 56 करोड़ रुपये का मजदूरी बिल उठाने के लिए फाइनेंशियल रिसोर्स नहीं हैं।

मनरेगा की जगह लेगा नया बिल

कांग्रेस सांसद पी चिदंबरम ने कहा कि यह बिल उस गारंटी पर ही हमला करता है जो इसे देनी चाहिए। उन्होंने कहा, “यह रोजी-रोटी खत्म करता है… सुरक्षा खत्म करता है। आप इसे ‘गारंटी वाला’ बिल क्यों कहते हैं? इसमें कोई गारंटी नहीं है। यह ग्रामीण गरीबों को रोजो-रोटी की गारंटी नहीं देता। इसमें कोई सुरक्षा नहीं है।”नया बिल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साइन करने की औपचारिकता के बाद कानून बन जाएगा। कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार द्वारा लागू की गई महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की जगह लेगा।

सरकार ने बिल के पक्ष में क्या तर्क दिया?

सरकार ने अपनी नई योजना का बचाव करते हुए 20 साल पुरानी योजना को अपडेट करने की जरूरत पर जोर दिया, जिसके बारे में उसका तर्क था कि वह बेकार थी और भ्रष्टाचार से भरी हुई थी। उसने काम के न्यूनतम दिनों की संख्या में बढ़ोतरी की ओर भी इशारा किया है। MNREGA के तहत 100 दिनों से बढ़ाकर G RAM G के तहत 125 दिन कर दिया गया है।

क्या है जी राम जी बिल?

विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण), या VB-G RAM G कानून को G RAM G भी कहा जा रहा है। यह विधेयक MNREGA की जगह लेगा और हर ग्रामीण परिवार को कानूनी तौर पर रोजगार की गारंटी देगा। इसमें कम से कम 125 दिन का काम शामिल है।

ये नौकरियां संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा बनाई और दी जाएंगी, जिनमें से हर कोई अब केंद्र सरकार के साथ वेतन का बोझ 40:60 के अनुपात में बांटेगा। और अगर नौकरी मांगने के 15 दिनों के अंदर नौकरी नहीं मिलती है तो भत्ता दिया जाएगा, जिसका पूरा खर्च सरकार उठाएगी। साथ ही, इस स्कीम में 60 दिन का ‘नो वर्क’ विंडो भी शामिल किया गया है।

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