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बढ़ता वजन सिर्फ खान-पान नहीं, कफ दोष भी हो सकता है वजह

By Muskan Thakur

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सोशल संवाद / डेस्क : आज के दौर में बढ़ता वजन और मोटापा एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। अधिकतर लोग इसके लिए गलत खान-पान, फास्ट फूड या शारीरिक गतिविधि की कमी को जिम्मेदार मानते हैं, लेकिन आयुर्वेद इसके पीछे एक और अहम कारण बताता है कफ दोष का असंतुलन। आयुर्वेद के अनुसार, जब शरीर में कफ और मेद (चर्बी) बढ़ने लगते हैं, तो वजन तेजी से बढ़ता है, भले ही व्यक्ति ज्यादा न खाता हो। इस स्थिति को आयुर्वेद में ‘स्थौल्य’ कहा गया है।

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क्या है कफ दोष और इसका वजन से क्या संबंध?

आयुर्वेद के तीन प्रमुख दोष वात, पित्त और कफ शरीर के संतुलन को बनाए रखते हैं। कफ दोष का स्वभाव ठंडा, भारी, चिकना और स्थिर होता है। जब कफ संतुलन में रहता है, तो शरीर को ताकत और स्थिरता मिलती है, लेकिन जब यह बढ़ जाता है, तो पाचन तंत्र सुस्त हो जाता है और मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ने लगता है। नतीजतन शरीर में चर्बी जमा होने लगती है।कफ-प्रधान मोटापे में खासतौर पर पेट, कूल्हों और जांघों में अधिक चर्बी जमा होती है। ऐसे लोगों को अक्सर कम भूख लगती है, लेकिन वजन तेजी से बढ़ता है, जो चिंता का कारण बन जाता है।

कफ बढ़ने के मुख्य कारण

आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार, आज की लाइफस्टाइल कफ दोष को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रही है। इसके प्रमुख कारण हैं:

  • दही, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक और ज्यादा दूध का सेवन
  • तला-भुना, मीठा और फास्ट फूड
  • रात में देर से और भारी भोजन
  • दिन में झपकी लेना
  • देर तक सोना और सुबह देर से उठना
  • शारीरिक गतिविधि की कमी और आलस्य

ये सभी आदतें शरीर में कफ को बढ़ाती हैं, जिससे वजन नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।

कफ-प्रधान मोटापे के लक्षण

अगर आपका वजन बढ़ रहा है और नीचे दिए गए लक्षण नजर आ रहे हैं, तो यह कफ दोष का संकेत हो सकता है:

  • सुबह उठते समय शरीर भारी लगना
  • कम भूख लेकिन मीठा खाने की इच्छा
  • चेहरा और शरीर फूला-फूला सा दिखना
  • पसीना कम आना
  • जल्दी थक जाना
  • सुस्ती और ज्यादा नींद
  • पाचन धीमा रहना और कब्ज की समस्या

आयुर्वेदिक उपाय जो घटा सकते हैं वजन

आयुर्वेद मानता है कि कफ को संतुलित करने से वजन अपने आप कम होने लगता है। इसके लिए कुछ आसान और प्राकृतिक उपाय अपनाए जा सकते हैं।

दिन की शुरुआत गुनगुने पानी या नींबू-शहद वाले पानी से करें। भोजन में हल्की चीजें जैसे मूंग दाल, जौ, दलिया और खिचड़ी शामिल करें। करेला, मेथी, परवल जैसी सब्जियां और अदरक, लहसुन, हल्दी का अधिक प्रयोग फायदेमंद होता है।

मीठा, तला हुआ, दही, आइसक्रीम और ठंडी चीजों का सेवन कम से कम करें। रात का खाना हल्का और जल्दी लें। सुबह जल्दी उठना और दिन में सोने से बचना भी कफ संतुलन में मदद करता है।

योग और घरेलू नुस्खे भी हैं असरदार

योग और प्राणायाम भी कफ दोष को कम करने में सहायक हैं। सूर्य नमस्कार, कपालभाति और अग्निसार प्राणायाम मेटाबॉलिज्म को तेज करते हैं और चर्बी घटाने में मदद करते हैं।इसके अलावा, रात में मेथी दाना भिगोकर सुबह खाली पेट खाना, सुबह त्रिफला चूर्ण का सेवन और दिन में छाछ में सेंधा नमक डालकर पीना भी लाभकारी माना जाता है।

जरूरी सलाह

हालांकि ये उपाय प्राकृतिक हैं, लेकिन हर व्यक्ति की प्रकृति अलग होती है। इसलिए कोई भी आयुर्वेदिक उपाय अपनाने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है।

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