सोशल संवाद/डेस्क: आम आदमी पार्टी ने MCD कमिश्नर को 50 करोड़ रुपये तक की वित्तीय शक्ति देने के फैसले को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का आरोप है कि इस अहम मुद्दे पर सदन में चर्चा से बचते हुए एजेंडा जल्दबाजी में पारित किया गया।

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एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने कहा कि जब सदन की बैठक के दौरान वित्तीय सीमा 5 करोड़ से बढ़ाकर 50 करोड़ करने के प्रस्ताव पर चर्चा की मांग की गई, तो डिप्टी मेयर ने बिना बहस के एजेंडा पारित कर सदन स्थगित कर दिया। उनके अनुसार, यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अनदेखी है।

आप का कहना है कि इस निर्णय के बाद निगम आयुक्त को बड़े वित्तीय प्रस्तावों के लिए स्टैंडिंग कमेटी या सदन की मंजूरी की आवश्यकता नहीं रहेगी। पार्टी ने सवाल उठाया कि जब महापौर, स्टैंडिंग कमेटी और सदन में बहुमत भाजपा के पास है, तो फिर चुनी हुई व्यवस्था को दरकिनार करने की जरूरत क्यों पड़ी।

अंकुश नारंग ने दावा किया कि यह कदम एमसीडी को कमजोर कर अफसरशाही को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है। उनका आरोप है कि इससे पार्षदों की भूमिका सीमित होगी और निर्णय प्रक्रिया केंद्रीकृत हो जाएगी।आप नेताओं ने एमसीडी एक्ट 1957 के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि वित्तीय सीमा में बड़ा बदलाव करने के लिए विधायी संशोधन जरूरी है। केवल प्रशासनिक आदेश से सीमा बढ़ाना नियमों की भावना के विपरीत है।

पार्टी ने यह भी आशंका जताई कि बड़ी परियोजनाओं को हिस्सों में बांटकर स्वीकृति दी जा सकती है, जिससे पारदर्शिता प्रभावित होगी। हालांकि भाजपा की ओर से अभी तक इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आम आदमी पार्टी ने चेतावनी दी है कि वह इस मुद्दे को लेकर सड़कों से लेकर सदन तक विरोध जारी रखेगी। पार्टी का कहना है कि वह चुने हुए प्रतिनिधियों के अधिकारों की रक्षा और एमसीडी में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए संघर्ष करेगी।










