---Advertisement---

फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट पर सख्त दिल्ली हाई कोर्ट, नौकरी से बर्खास्तगी तक संभव

By Aditi Pandey

Updated On:

Follow
Delhi High Court strict on fake medical certificate दिल्ली

Join WhatsApp

Join Now

सोशल संवाद/डेस्क: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम निर्णय में कहा है कि काम से छुट्टी लेने के लिए fake medical certificate (जाली मेडिकल सर्टिफिकेट) पेश करना गंभीर कदाचार माना जाएगा और इससे कर्मचारी की नौकरी चली भी सकती है। अदालत ने यह बात एक शिकायत पर सुनवाई के दौरान स्पष्ट की।

यह भी पढ़ें: बजट सत्र से पहले विधानसभा क्षेत्र में धारा 163 लागू, 750 मीटर तक निषेधाज्ञा

क्या था मामला?

यह मामला इंडियन ऑडिट एंड अकाउंट्स डिपार्टमेंट के एक क्लर्क से जुड़ा है। उसने बिना अनुमति लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के लिए टीबी बीमारी का हवाला दिया और मेडिकल सर्टिफिकेट जमा किया था, जिसमें यह दावा किया गया कि वह बीमारी के कारण कार्यालय नहीं आ सका। बाद में यह पता चला कि वह डॉक्टरी प्रमाणपत्र असली नहीं था और जिस डॉक्टर के नाम से सर्टिफिकेट जारी होने का दावा किया गया, वह उसी समय ड्यूटी पर मौजूद नहीं था।

कोर्ट ने क्या कहा?

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसे फर्जी दस्तावेज पेश करना गंभीर ग़लत आचरण (grave misconduct) है, जो नियोक्ता के विश्वास को तोड़ता है। अदालत ने यह भी माना कि अगर कर्मचारी नकली सर्टिफिकेट देती है ताकि वह बिना मंजूरी के छुट्टी ले सके या वेतन कटने से बच सके, तो यह विभागीय नियमों के खिलाफ है और नौकरी से बर्खास्तगी का कारण बन सकता है।

कानून और जांच प्रक्रिया

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि विभागीय जांच के लिए आपराधिक मामलों में लागू “संदेह से परे” प्रमाण के मानक की आवश्यकता नहीं होती। यानी विभाग अपनी जांच और नियमों के अनुसार साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष निकाल सकता है कि सर्टिफिकेट नकली था और दोषी कर्मचारी को बर्खास्त करने का निर्णय उचित है।

नौकरी और अनुशासन

न्यायालय ने यह निर्णय बहाल किया कि न केवल उपस्थिति के नियमों का उल्लंघन हुआ, बल्कि विभाग को धोखा देकर नकली दस्तावेज जमा करना ईमानदारी के खिलाफ गंभीर कदाचार है। ऐसे मामलों में नौकरी से बर्खास्त किया जाना अनुपातहीन सजा नहीं है क्योंकि इससे नियोक्ता और विभागीय भरोसे को नुकसान होता है।

कर्मियों के लिए चेतावनी

यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए चेतावनी है जो बिना मंजूरी के छुट्टी लेने का झूठा सहारा ढूंढते हैं। fake medical grounds का इस्तेमाल न केवल विभागीय कार्रवाई के साथ नौकरी खोने का कारण बन सकता है, बल्कि भविष्य के लिए भी सेवाओं में भरोसा कम कर सकता है।

इसके अलावा अदालत ने यह संकेत दिया कि सरकारी संस्थानों और विभागों को अपने कर्मचारियों के प्रति नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिए ताकि कर्मचारियों के बीच अनुशासन और ईमानदारी बनी रहे।

YouTube Join Now
Facebook Join Now
Social Samvad MagazineJoin Now
---Advertisement---