सोशल संवाद/डेस्क : ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पर मंडरा रहे संकट के बीच भारत के लिए राहत की खबर सामने आई है। युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार एक कच्चा तेल लेकर आने वाला टैंकर सुरक्षित रूप से Strait of Hormuz को पार कर Mumbai Port पहुंच गया है। इस घटनाक्रम को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

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जानकारी के मुताबिक, लाइबेरिया के झंडे वाला टैंकर Shenlong Suezmax सऊदी अरब के Ras Tanura Port से कच्चा तेल लोड कर भारत के लिए रवाना हुआ था। यह जहाज 1 मार्च को तेल लेकर निकला और दो दिन बाद अपनी यात्रा शुरू की। समुद्री ट्रैकिंग डेटा के अनुसार यह 8 मार्च को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के भीतर देखा गया था।
गौरतलब है कि हाल ही में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई थी। ईरान की ओर से कई व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाए जाने और तेल टैंकरों को चेतावनी देने के कारण दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक पर खतरा बढ़ गया था। दुनिया के कुल कच्चे तेल का करीब पांचवां हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
समुद्री सूत्रों के अनुसार खतरनाक क्षेत्र से गुजरते समय इस टैंकर ने कुछ समय के लिए अपने ट्रांसपोंडर और ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम को बंद कर दिया था। ऐसा आमतौर पर जहाजों की लोकेशन छिपाने और संभावित हमलों से बचने के लिए किया जाता है। बाद में यह जहाज फिर से ट्रैकिंग सिस्टम पर दिखाई दिया और सुरक्षित रूप से मुंबई पहुंच गया।
मुंबई पोर्ट अधिकारियों के मुताबिक यह टैंकर बुधवार दोपहर करीब 1 बजे बंदरगाह क्षेत्र में पहुंचा और शाम करीब 6 बजे जवाहर द्वीप टर्मिनल पर इसे खड़ा किया गया। जहाज करीब 1,35,335 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर आया है। इस तेल को मुंबई के पूर्वी इलाके माहुल स्थित रिफाइनरियों में भेजा जाएगा।
जहाज के संचालन से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि इसमें कुल 29 क्रू सदस्य सवार हैं, जिनमें भारतीय, पाकिस्तानी और फिलीपीन नागरिक शामिल हैं। जहाज के कप्तान भारतीय नाविक Sukshant Singh Sandhu हैं। जहाज से तेल उतारने की प्रक्रिया करीब 36 घंटे तक चलने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस टैंकर का सुरक्षित पहुंचना भारत के लिए सकारात्मक संकेत है, क्योंकि देश की आधे से ज्यादा कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती है। यदि इस मार्ग पर लंबे समय तक बाधा बनी रहती तो भारत समेत कई एशियाई देशों में ऊर्जा संकट गहराने का खतरा था।
हालांकि स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं मानी जा रही है। भारत के जहाजरानी महानिदेशालय के अनुसार इस समय करीब 28 भारतीय ध्वज वाले जहाज अभी भी उस क्षेत्र के आसपास मौजूद हैं। इनमें से कुछ जहाज सुरक्षित समुद्री क्षेत्रों की ओर बढ़ चुके हैं।
कुल मिलाकर, मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के बीच इस टैंकर की सुरक्षित यात्रा भारत के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक क्षेत्र में तनाव कम नहीं होता, तब तक वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर जोखिम बना रह सकता है।









