सोशल संवाद / डेस्क : 1984 सिख दंगों के पीड़ितों को मुआवजा देने से जुड़ी जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया और मामले की स्थिति स्पष्ट करने को कहा।

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1984 सिख दंगों के पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग पर हाईकोर्ट में सुनवाई
1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग से जुड़ी एक जनहित याचिका (PIL) पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा और पूछा कि दंगा पीड़ितों को मुआवजा देने की प्रक्रिया में अब तक क्या प्रगति हुई है।
दरअसल, याचिका में कहा गया है कि 1984 के दंगों के बाद कई पीड़ित परिवारों को आज तक उचित मुआवजा नहीं मिला है। ऐसे में सरकार को निर्देश दिया जाए कि सभी प्रभावित लोगों की पहचान कर उन्हें जल्द राहत दी जाए।
39 साल बाद भी कई पीड़ितों को नहीं मिला पूरा न्याय
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि 1984 में हुए दंगों में कई परिवारों ने अपने परिजन और संपत्ति खो दी थी। इसके बावजूद कई पीड़ितों को अब तक मुआवजा नहीं मिल पाया है या प्रक्रिया अधूरी है।
बताया गया कि इस मामले की जांच के लिए एक वन मैन कमीशन का गठन किया गया था, जिसने दंगा पीड़ितों से आवेदन लेकर रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। लेकिन रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा वितरण की प्रक्रिया लंबे समय से लंबित है।
सरकार से मांगा गया जवाब
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से पूछा कि आयोग की रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई की गई और पीड़ितों को मुआवजा देने की दिशा में क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने सरकार को मामले की विस्तृत स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
1984 के दंगे क्यों हुए थे
1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़क उठी थी। इन दंगों में हजारों लोग प्रभावित हुए और बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई तथा संपत्ति का भारी नुकसान हुआ।
अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें
मामले में अब अगली सुनवाई में यह तय हो सकता है कि सरकार दंगा पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है। पीड़ित परिवारों को उम्मीद है कि लंबे समय से लंबित न्याय और राहत की प्रक्रिया अब तेज होगी।









