सोशल संवाद / जमशेदपुर : वन विभाग ने अपनी भूमि पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है. दलमा और आसपास के इलाके को खाली कराने के साथ ही अब बहरागोड़ा, चाकुलिया, घोड़ाबांधा, मानगो, भिलाई पहाड़ी, जोड़ीसा, बेको और हथियाडीह समेत कई इलाकों से अतिक्रमण हटाया जाना है.

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इसे लेकर डीएफओ सबा आलम अंसारी के स्तर पर सार्वजनिक और अंतिम नोटिस जारी कर दी गयी है. 18 मार्च तक ऐसे लोगों को विभाग के समक्ष हाजिर होने को कहा गया है. अगर ये लोग नहीं आते हैं, तो उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की जायेगी और दोषियों को किसी भी हाल में नहीं बख्शा जायेगा. राज्य सरकार ने अतिक्रमित वन भूमि को खाली कराने का स्पष्ट टारगेट विभाग को दे दिया है. डीजीपीएस के जरिये यह पता लगाया जायेगा अतिक्रमण कहां-कहां है. सूत्रों के मुताबिक, पूर्वी सिंहभूम में करीब 10 हजार हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमित है. शहर में अपना आशियाना बनाने के चक्कर में कई लोगों ने अपनी जीवनभर की पूंजी लगा दी है.
लैंडबैंक बनेगा, रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे :
दूसरी ओर, वन भूमि पर होने वाले अतिक्रमण को रोकने के लिए “वन प्रबंधन समिति” की भी मदद ली जा रही है. इसे पौधरोपण और संरक्षण से जोड़कर रोजगार के अवसर बनाये जाएंगे. वन एवं पर्यावरण विभाग अपना लैंडबैंक तैयार करेगा, जिसके लिए वन भूमि के अभिलेखों की सहायता ली जाएगी और पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा. लैंडबैंक का उपयोग पौधरोपण के साथ संरचनात्मक विकास के लिए करने की योजना है. विभाग ने दस वर्षों की कार्ययोजना के तहत इसे लक्ष्य के तौर पर निर्धारित किया है.
सबा आलम अंसारी, डीएफओ,जमशेदपुर ने बताया कि डीजीपीएस के जरिये यह पता लगाया जा रहा है कि अतिक्रमण कहां-कहां है. भारी पैमाने पर वन भूमि के अतिक्रमण के अलावा डीजीपीएस से कई अन्य मामलों का भी सटीक पता चल चुका है. इन अतिक्रमणों को हटाने के लिए हर उस एरिया में नोटिस भेजा जा रहा है.









