सोशल संवाद / रांची : नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा (होटवार जेल) के अधीक्षक पर महिला बंदी का मानसिक और शारीरिक शोषण करने का आरोप लगाया है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को चिट्ठी लिखी है। मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। इस सनसनीखेज आरोप ने राज्य के सियासी और प्रशासनिक महकमे में भूचाल ला दिया है। होटवार जेल एक बार फिर शर्मनाक और गंभीर विवादों के घेरे में आ गया है।

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बाबूलाल ने पत्र में लिखा है कि उनके पास इसके पर्याप्त सबूत हैं। महिला बंदी गर्भवती हो गई है। यह संस्थागत अपराध है और इस तरह की घटना राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था के पूरी तरह से ध्वस्त होने का प्रमाण है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि इस गंभीर मामले में कार्रवाई करने की बजाय प्रशासनिक अधिकारी पूरे प्रकरण को दबाने में जुटे हैं। उन्होंने जेल आईजी पर फाइलों को गायब करने और दोषी अधिकारी को संरक्षण देने का भी आरोप लगाया।
बाबूलाल का कहना है कि महिला बंदी को बीमारी और इलाज के बहाने जेल से बाहर गुप्त स्थानों और अस्पतालों में ले जाया जा रहा है, ताकि हर प्रकार के जैविक और फॉरेंसिक साक्ष्य को समय रहते नष्ट किया जा सके। इसके बाद रविवार को जेल प्रशासन ने महिला की गर्भावस्था की जांच कराई, जिसमें रिपोर्ट निगेटिव आई।
जेल प्रशासन की ओर से कराई गई जांच रिपोर्ट
यह रिपोर्ट रविवार को कराई गई बीटा एचसीजी टेस्ट की है। इसमें मरीज का बीटा एचसीजी का स्तर 0.100 एमएलयू/एमएल है, जो सामान्य सीमा 5.0 एमएलयू/एमएल से काफी नीचे है। यानी यह रिपोर्ट निगेटिव है। यह गर्भावस्था का संकेत नहीं देता है।
सात नवंबर 2025 को गिरफ्तारी, 12 मई 2026 को मामला सामने आया
ब्राउन शुगर तस्करी मामले में सुखदेव नगर पुलिस ने 7 नवंबर 2025 को महिला को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसे होटवार जेल भेजा गया। जेल प्रशासन के अनुसार 28 अप्रैल को उसने पेट दर्द की शिकायत की तो जेल प्रशासन ने उसका इलाज कराया। बताया जा रहा है कि 12 मई को उसने वार्ड में रह रही महिला बंदियों को बताया कि उसके साथ गलत हुआ है। यह बात जेल में तेजी से फैली। जेलर लवकुश कुमार तक भी बात पहुंची तो उन्होंने जेल अधीक्षक को इसकी सूचना दी। फिर महिला डॉक्टर अपराजिता के नेतृत्व में टीम बनाकर उसकी जांच कराई गई। इसके बाद जेल अधीक्षक के चंद्रशेखर ने 13 मई को जेल आईजी सुदर्शन मंडल को इसकी जानकारी दी। उन्होंने जल अधीक्षक से पूछताछ की। जांच रिपोर्ट का डॉक्टर से एनालिसिस कराया। लेकिन उसके गर्भवती होने की पुष्टि नहीं हुई।
टेस्ट में गर्भवती होने की पुष्टि नहीं
बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा के डॉ. मुकेश ने बताया कि महिला डॉक्टर अपराजिता के नेतृत्व में टीम बनाकर महिला की ब्लड जांच कराई गई थी। उसका अल्ट्रासाउंड भी कराया था। लेकिन दोनों जांच में गर्भवती होने की पुष्टि नहीं हुई। जेल प्रबंधन की ओर से अब कोर्ट को पत्र लिखा जाएगा। वहां से अनुमति मिलने के बाद महिला बंदी की जांच किसी सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की टीम से कराई जाएगी, ताकि सच सामने आ सके।










