सोशल संवाद/डेस्क: देशभर में रसोई गैस यानी LPG की किल्लत अब गंभीर संकट का रूप लेती जा रही है। सप्लाई में कमी के बीच सिलेंडरों की कालाबाजारी तेज हो गई है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

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LocalCircles के एक हालिया सर्वे के मुताबिक, करीब 20 प्रतिशत परिवारों को मजबूरी में ब्लैक में सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है। इसके लिए उन्हें ₹4,000 तक अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। सिर्फ महंगाई ही नहीं, बल्कि डिजिटल सिस्टम की खामियां भी लोगों की परेशानी बढ़ा रही हैं। सर्वे में सामने आया है कि 12 प्रतिशत उपभोक्ताओं को ‘फैंटम डिलीवरी’ के मैसेज मिल रहे हैं। यानी सिलेंडर घर तक पहुंचा ही नहीं, लेकिन सिस्टम में डिलीवरी पूरी दिखा दी जाती है।
इस संकट की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा तनाव है। Strait of Hormuz में अस्थिर स्थिति के कारण गैस सप्लाई प्रभावित हुई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है। इसके साथ ही Ras Laffan Industrial City स्थित दुनिया के सबसे बड़े LNG हब पर असर पड़ने से वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हुई है। इन दोनों कारणों ने मिलकर देश में LPG की उपलब्धता को बुरी तरह प्रभावित किया है।
स्थिति यह है कि केवल 28 प्रतिशत परिवारों को ही समय पर सिलेंडर मिल पा रहा है, जबकि 68 प्रतिशत घरों को डिलीवरी में देरी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में लोग एक बार फिर पारंपरिक ईंधनों पर निर्भर होने लगे हैं।
बढ़ती शिकायतों के बाद Ministry of Petroleum and Natural Gas ने सख्त कदम उठाए हैं। जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए देशभर में 4,500 से अधिक छापेमारी की गई है, जिनमें उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा कार्रवाई हुई है।
सरकार ने 32 राज्यों में कंट्रोल रूम स्थापित किए हैं और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को औचक निरीक्षण के निर्देश दिए हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि पैनिक बुकिंग में कमी आई है, लेकिन जमीनी हकीकत में समस्या अभी भी बरकरार है। कुल मिलाकर, अंतरराष्ट्रीय संकट और घरेलू स्तर पर सिस्टम की खामियों ने मिलकर LPG सप्लाई को प्रभावित किया है, जिससे आम जनता की रसोई पर सीधा असर पड़ रहा है।









