सोशल संवाद/डेस्क: उत्तर प्रदेश के वाराणसी से एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां गंगा घाट में नाव पर इफ्तार पार्टी करने के आरोप में गिरफ्तार 14 युवकों को अदालत से राहत नहीं मिली है। वाराणसी के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सभी आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि मामले की परिस्थितियां और प्रस्तुत तथ्य जमानत देने के अनुकूल नहीं हैं।

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दरअसल, रमजान के दौरान इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें कुछ युवक नाव पर इफ्तार करते नजर आए थे। आरोप है कि इस दौरान खाने के अवशेष, यहां तक कि हड्डियां भी गंगा में फेंकी गईं, जिससे धार्मिक आस्था से जुड़ा विवाद खड़ा हो गया। इस मामले को लेकर वादी पक्ष के अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने इसे गंगा और सनातन आस्था के साथ खिलवाड़ बताया।
यह पूरा मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने वायरल वीडियो के आधार पर कार्रवाई करते हुए सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया था। आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की कई गंभीर धाराओं के साथ-साथ आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।
इस घटना के सामने आने के बाद न केवल प्रशासनिक कार्रवाई तेज हुई, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। फिलहाल सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और मामले की आगे की जांच जारी है।









