सोशल संवाद/डेस्क: वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर पड़ता दिख रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिससे तेल कंपनियों की लागत बढ़ गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए पेट्रोल और डीजल परExcise Duty में भारी कटौती की है।

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सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये कर दी है, जबकि डीजल पर इसे पूरी तरह शून्य कर दिया गया है। हालांकि, इस फैसले के बावजूद आम लोगों को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में सीधी राहत नहीं मिलेगी।
दरअसल, सरकार का कहना है कि यह कटौती इसलिए की गई है ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही कीमतों का बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर न पड़े। यानी अगर यह कदम नहीं उठाया जाता, तो पेट्रोल और डीजल के दाम और ज्यादा बढ़ सकते थे।
इसके अलावा सरकार ने पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर ड्यूटी बढ़ा दी है, जिससे देश में इनकी पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे। वित्त मंत्री ने भी साफ किया है कि यह फैसला उपभोक्ताओं को महंगाई से बचाने के लिए लिया गया है।
पेट्रोलियम मंत्री के अनुसार, पिछले एक महीने में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। दुनिया के कई देशों में ईंधन की कीमतें 20 से 50 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं, लेकिन भारत में सरकार ने खुद आर्थिक बोझ उठाकर कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की है।
देश के प्रमुख शहरों की बात करें तो दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और नोएडा में पेट्रोल-डीजल की कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि सरकार के इस फैसले से भले ही कीमतें कम न हुई हों, लेकिन बढ़ती महंगाई से आम जनता को बड़ी राहत जरूर मिली है।









