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शराब के बिक्री में शामिल सरकारी उपक्रमों के 5 साल के वित्तीय रिकॉर्ड का होगा क्रॉस-वेरिफिकेशन

By Muskan Thakur

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सोशल संवाद/डेस्क : दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि राजधानी में शराब की रिटेल बिक्री से जुड़े सरकारी उपक्रमों के वित्तीय मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता, लापरवाही या गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हाल ही में यह तथ्य सामने आया है कि शराब बिक्री से जुड़े कुछ सरकारी उपक्रमों में लंबे समय तक खातों का समुचित मिलान नहीं किया गया, जिसके चलते वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी खजाने को संभावित नुकसान की स्थिति बनी है।

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मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली में शराब की खुदरा बिक्री का संचालन दिल्ली उपभोक्ता सहकारी थोक भंडार (डीसीसीडब्ल्यूएस), दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (डीटीटीडीसी), दिल्ली राज्य नागरिक आपूर्ति निगम (डीएससीएससी) और दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) जैसे सरकारी संस्थानों को सौंपा गया है, जिन्होंने शहर के विभिन्न हिस्सों में रिटेल आउटलेट स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य न केवल वित्तीय रिकॉर्ड की शुद्धता सुनिश्चित करना है, इसके लिए खातों की सख्त निगरानी, मिलान और रिकॉर्ड का वेरिफिकेशन और वैलिडेशन की व्यापक प्रक्रिया लागू की जा रही है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने निर्देश दिए हैं कि सभी संबंधित संस्थाएं अपने पिछले पांच वर्षों के वित्तीय एवं संचालन से जुड़े रिकॉर्ड का व्यापक मिलान करें। इसमें बिक्री, खरीद, स्टॉक और नकद खातों से संबंधित सभी प्रविष्टियों की गहन जांच शामिल होगी। साथ ही इन संस्थाओं को दिल्ली सरकार के आबकारी विभाग के साथ करीबी समन्वय स्थापित करते हुए सभी रिकॉर्ड का वेरिफिकेशन और वैलिडेशन सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आबकारी आयुक्त द्वारा इन संस्थाओं के बिक्री, स्टॉक और राजस्व संबंधी आंकड़ों का स्वतंत्र रूप से क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार की वित्तीय कुप्रबंधन या गड़बड़ी की पूरी तरह पहचान की जा सके।

मुख्यमंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि अगर जांच में किसी भी स्तर पर अनियमितता, वित्तीय कुप्रबंधन या सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने के तथ्य सामने आते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा कि सार्वजनिक धन की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।

उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि सभी संबंधित संस्थाएं और आबकारी विभाग इस पूरी प्रक्रिया की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर आदेश जारी होने की तिथि से दो माह के भीतर वित्त विभाग को अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करें। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इन सख्त कदमों से न केवल वित्तीय पारदर्शिता मजबूत होगी, बल्कि राजस्व वसूली की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनेगी।

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