सोशल संवाद/डेस्क : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में उन वोटरों को मतदान की इजाजत देने से इनकार कर दिया, जिनके नाम SIR में काटे गए हैं और उनकी शिकायत अपीलीय ट्रिब्यूनलों में लंबित हैं।

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चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि अगर हम ऐसे वोटरों को वोट डालने की इजाजत देंगे तो उन लोगों के वोटिंग अधिकार छीनने होंगे जिनके नाम SIR लिस्ट में शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि वोटिंग से 10 दिन पहले, इस स्टेज पर चुनाव प्रक्रिया में कोई दखल नहीं देंगे।
CJI ने कहा कि अगर SIR प्रक्रिया को लेकर ऐसे ही आपत्तियां आती रहीं, तो चुनाव कैसे होंगे। कलकत्ता हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 11 अप्रैल तक 34 लाख से अधिक अपीलें दायर की जा चुकी हैं जिनपर फैसला आना बाकी है।
कोर्ट बोला- जीत के अंतर से ज्यादा वोटर वोट नहीं डाल पाए तो दखल देंगे
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव परिणाम में तभी दखल दिया जाएगा, जब बड़ी संख्या में मतदाता बाहर किए गए हों और वह संख्या जीत के अंतर को प्रभावित करती हो।
जस्टिस बागची ने आयोग से कहा- मान लीजिए कि जीत का अंतर 2% है और 15% मतदाता वोट नहीं डाल सके, तो हमें इस पर सोचना होगा। यह चिंता का मामला हो सकता है। यह मत समझिए कि बाहर किए गए मतदाताओं का सवाल हमारे दिमाग में नहीं है।
कोर्ट बोला- जांच अधिकारियों से 100% सटीकता की उम्मीद नहीं कर सकते
जस्टिस बागची ने यह भी कहा कि SIR प्रक्रिया में काम कर रहे न्यायिक अधिकारियों से भी जांच प्रक्रिया के दौरान कुछ गलतियां हुई होंगी। उन्होंने कहा- न्यायिक अधिकारियों से 100% सटीकता की उम्मीद नहीं की जा सकती, क्योंकि वे बहुत प्रेशर में काम कर रहे हैं।
जस्टिस बागची ने कहा कि जब कोई अधिकारी रोज 1000 से ज्यादा दस्तावेजों की जांच करता है और समयसीमा भी कड़ी होती है, तो 70% सटीकता भी बेहतरीन मानी जाएगी। इसलिए एक मजबूत अपीलीय तंत्र जरूरी है।









