सोशल संवाद/डेस्क: महिला आरक्षण को लेकर सियासत तेज हो गई है। मेयर सुधा गुप्ता ने केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि महिला आरक्षण के नाम पर देश की महिलाओं को गुमराह किया जा रहा है। तिलक पुस्तकालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि 33 प्रतिशत आरक्षण का कानून तो बना दिया गया, लेकिन इसे ऐसी शर्तों में बांध दिया गया है कि इसका लागू होना वर्षों तक टल सकता है।

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उन्होंने बताया कि इस कानून को लागू करने से पहले नई जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है, जबकि अभी तक जनगणना ही नहीं हुई है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि महिला आरक्षण 2029 या उससे भी आगे लागू हो सकता है। मेयर ने आरोप लगाया कि अगर सरकार की मंशा साफ होती, तो यह व्यवस्था तुरंत लागू की जा सकती थी।
सुधा गुप्ता ने यह भी कहा कि विपक्ष की मांग थी कि मौजूदा सीटों पर ही 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाए, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर महिलाओं को उनके अधिकार जल्द नहीं दिए गए, तो सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन देखने को मिल सकता है।
मेयर ने मांग की कि महिला आरक्षण को बिना शर्त तुरंत लागू किया जाए और जनगणना व परिसीमन के नाम पर इसे टालना बंद किया जाए। साथ ही उन्होंने 33 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के प्रावधान को भी इसमें शामिल करने की बात कही।









