सोशल संवाद/डेस्क: आदिवासी भूमिज मुंडा चुआड़ सेना द्वारा दायर सिविल मुकदमे में आज भी प्रतिवादी पक्ष की अनुपस्थिति बनी रही, जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। यह मामला शैलेंद्र महतो एवं अन्य के विरुद्ध, उनकी पुस्तक “झारखंड की समर गाथा” में वर्णित चुआड़ विद्रोह से जुड़े तथ्यों को लेकर दायर किया गया है।

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मामले में प्रतिवादी निधि बुक्स (प्रकाशन), इसके मैनेजिंग डायरेक्टर तथा प्रोप्राइटर दानिश डिस्ट्रीब्यूटर्स लगातार अदालत में पेश नहीं हो रहे हैं। करीब एक वर्ष पूर्व दर्ज इस मुकदमे में प्रतिवादी संख्या 2 से 4 की बार-बार अनुपस्थिति के बावजूद न्यायालय द्वारा पूर्व में समन और नोटिस जारी किए जा चुके हैं।


माननीय सिविल न्यायालय, रांची ने 20 फरवरी 2026 को अंतिम अवसर देते हुए विशेष कोर्ट नोटिस जारी किया था, जिसमें 20 अप्रैल 2026 को सशरीर उपस्थित होने का आदेश दिया गया था। यह नोटिस 20 मार्च 2026 को विभिन्न समाचार पत्रों में भी प्रकाशित किया गया था। इसके बावजूद आज भी सभी संबंधित प्रतिवादी अनुपस्थित रहे।
वादी पक्ष के अधिवक्ता विवेक आर्य के अनुसार, प्रतिवादियों की लगातार अनुपस्थिति के कारण सुनवाई में बाधा उत्पन्न हो रही है। अदालत ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए अन्य प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर समाप्त कर दिया है और उनके विरुद्ध एकतरफा कार्रवाई का आदेश दिया है।
आदिवासी भूमिज मुंडा चुआड़ सेना के महासचिव सागर सरदार ने कहा कि पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो ने स्वयं अपनी पुस्तक में किए गए उल्लेखों पर आपत्ति होने पर अदालत जाने की चुनौती दी थी। उसी के आधार पर यह कानूनी कार्रवाई की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रकाशक और वितरक द्वारा न्यायालय की अवहेलना की जा रही है।
सागर सरदार ने आगे कहा कि चुआड़ विद्रोह भूमिज आदिवासी समुदाय के गौरवशाली इतिहास का हिस्सा है, जिसे तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करना समुदाय की भावनाओं को आहत करता है। उन्होंने कहा कि संगठन इस मामले में न्याय की उम्मीद के साथ अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखेगा।
संगठन ने सभी आदिवासी संगठनों, बुद्धिजीवियों और जागरूक नागरिकों से अपील की है कि वे इस मुद्दे पर सजग रहें और आदिवासी इतिहास एवं अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर समर्थन करें।









