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ओटी में 2 घंटे रखा बेहोश, बिना ऑपरेशन भेज दिया वार्ड में

By Riya Kumari

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ओटी में 2 घंटे रखा बेहोश, बिना ऑपरेशन भेज दिया वार्ड में
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सोशल संवाद / जमशेदपुर : एमजीएम अस्पताल में शुक्रवार को डॉक्टरों की आपसी खींचतान और प्रतिष्ठा की लड़ाई में एक महिला मरीज की जान दांव पर लगा दी गई। गोविंदपुर निवासी शांति देवी को गॉल ब्लाडर स्टोन के ऑपरेशन के लिए शुक्रवार को तीसरी बार तारीख दी गई थी। परिजनों से इमरजेंसी के लिए ब्लड भी जमा करा लिया गया।

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इसके बाद मरीज को ऑपरेशन थिएटर ले जाकर एनेस्थीसिया (बेहोशी की दवा) दे दी गई। लेकिन डॉक्टरों के आपसी विवाद के कारण करीब दो घंटे तक बेहोश रखने के बाद बिना ऑपरेशन मरीज को वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। इस लापरवाही से भड़के परिजनों ने सवाल उठाया कि अगर मरीज को कुछ हो जाता तो जिम्मेदारी कौन लेता?

मुख्य सर्जन के नहीं होने के बावजूद मरीज को बेहोश कर दिया

मेडिकल साइंस में मरीज को बेहोश करना बेहद जोखिम भरा है। बड़ा सवाल यह है कि जब मुख्य सर्जन डॉ. सरवर ओटी में मौजूद ही नहीं थे, तो किसकी अनुमति से मरीज को एनेस्थीसिया दिया गया ? क्या एमजीएम की ओटी में सुरक्षा प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं? डॉक्टरों की इस अहंकार की लड़ाई की कीमत कोई गरीब मरीज अपनी जान देकर क्यों चुकाए? यह सीधे तौर पर मेडिकल एथिक्स का मर्डर है। प्रबंधन को इस मामले में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में मरीजों की जिंदगी से ऐसा खिलवाड़ न हो।

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