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धरती आबा अभियान के तहत आदिवासी किसानों को मछली पालन पर 90% अनुदान, बढ़ेगी आय और रोजगार

By Riya Kumari

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धरती आबा अभियान के तहत आदिवासी किसानों को मछली पालन पर 90% अनुदान, बढ़ेगी आय और रोजगार

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सोशल संवाद / रांची: झारखंड के आदिवासी किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DAJGUA) के तहत मछली पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत पात्र जनजातीय किसानों को मछली पालन परियोजनाओं पर 90 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण को नई गति मिलेगी।

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योजना का उद्देश्य आदिवासी बहुल गांवों में आजीविका के नए अवसर सृजित करना, पोषण सुरक्षा को मजबूत करना और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से मत्स्य उत्पादन बढ़ाना है। इसके तहत तालाब निर्माण, केज फिश फार्मिंग, बायोफ्लॉक तकनीक और अन्य आधुनिक मत्स्य पालन गतिविधियों को प्रोत्साहन दिया जाएगा।

90% सब्सिडी से मिलेगा बड़ा लाभ

अभियान के तहत चयनित लाभुकों को मछली पालन से जुड़ी परियोजनाओं पर 90 प्रतिशत तक सरकारी सहायता मिलेगी। वहीं समूह आधारित परियोजनाओं को और अधिक प्रोत्साहन देने की भी व्यवस्था की गई है। इस पहल से आदिवासी परिवारों की आय बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

आधुनिक तकनीक से बढ़ेगा उत्पादन

सरकार और मत्स्य विभाग की ओर से लाभुकों को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। केज कल्चर, बायोफ्लॉक और वैज्ञानिक मत्स्य पालन पद्धतियों के जरिए कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे किसानों को बेहतर आमदनी के साथ स्थायी आजीविका का विकल्प मिलेगा।

आदिवासी गांवों के समग्र विकास पर फोकस

धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य जनजातीय बहुल गांवों में बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना है। इस अभियान के तहत कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना जैसे क्षेत्रों में विशेष पहल की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मछली पालन पर मिलने वाली यह सब्सिडी झारखंड के आदिवासी किसानों के लिए आर्थिक बदलाव का बड़ा माध्यम बन सकती है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।

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