सोशल संवाद / नई दिल्ली : भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव एवं वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मौजूदा स्वरूप में यह समझौता भारतीय किसानों और घरेलू उद्योगों के हितों के खिलाफ हो सकता है। उन्होंने सरकार से किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग की।

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अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि की भारत यात्रा के बीच उठे सवाल
जयराम रमेश ने कहा कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर की भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब दोनों देशों के बीच व्यापारिक समझौते को लेकर चर्चाएं तेज हैं। उन्होंने दावा किया कि 6 फरवरी 2026 को भारत और अमेरिका के बीच जारी संयुक्त बयान में अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर टैरिफ में राहत देने का आश्वासन दिया था, जबकि भारत ने अमेरिकी कृषि और औद्योगिक उत्पादों पर शुल्क में कटौती सहित बड़े पैमाने पर खरीदारी की प्रतिबद्धता जताई थी।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदले हालात
कांग्रेस नेता ने कहा कि 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रेसिप्रोकल टैरिफ नीति को अवैध घोषित किए जाने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई। उनके अनुसार, इसके बाद अमेरिका ने अपने कई व्यापारिक साझेदार देशों पर अस्थायी टैरिफ लागू कर दिए, जिससे पहले किए गए आश्वासनों पर अनिश्चितता पैदा हो गई।
उन्होंने कहा कि भारत समेत कई देशों के खिलाफ अमेरिकी जांच भी चल रही है, जिसमें कथित गलत व्यापारिक प्रथाओं की जांच की जा रही है। ऐसे में अमेरिका इस जांच का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए कर सकता है।
किसानों और कृषि क्षेत्र पर असर की आशंका
जयराम रमेश ने आशंका जताई कि यदि भारत बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के किसी व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करता है, तो इसका असर देश के कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के किसानों पर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि किसी भी समझौते में भारत को अपने किसानों, छोटे व्यापारियों और घरेलू उद्योगों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
मलेशिया का उदाहरण देते हुए सरकार को दी सलाह
उन्होंने कहा कि भारत को जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहिए और उन देशों के अनुभवों से सीखना चाहिए जिन्होंने अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए व्यापारिक समझौतों पर पुनर्विचार किया है। उन्होंने सरकार से पारदर्शिता के साथ सभी पक्षों को भरोसे में लेकर आगे बढ़ने की अपील की।
सरकार से स्पष्ट नीति की मांग
जयराम रमेश ने केंद्र सरकार से व्यापार समझौते की शर्तों को सार्वजनिक करने और देश को यह बताने की मांग की कि प्रस्तावित डील से किसानों, उद्योगों और आम उपभोक्ताओं को क्या लाभ होगा। उन्होंने कहा कि भारत को किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों से समझौता नहीं करना चाहिए।
हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।










