सोशल संवाद / जमशेदपुर : मुंह और ब्रेस्ट कैंसर की जांच के लिए अब मरीजों को बड़े शहरों या विशेषज्ञ संस्थानों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। जल्द ही गांवों और छोटे शहरों में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित मोबाइल एप की मदद से कैंसर की शुरुआती पहचान की जा सकेगी।

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इसके लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) एक विशेष एआई एप विकसित कर रहा है। इस परियोजना के लिए देश के 10 मेडिकल कॉलेजों और आईसीएमआर से जुड़े संस्थानों से कैंसर के सैंपल जुटाए गए हैं। झारखंड से एमजीएम मेडिकल कॉलेज, जमशेदपुर और रिम्स, रांची भी
इस परियोजना का हिस्सा हैं। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के
एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. उमाशंकर सिंह ने बताया कि संस्थान की ओर से आईसीएमआर को कुल 160 सैंपल भेजे गए हैं। इनमें मुंह के कैंसर के 40, गैर-कैंसर के 40, ब्रेस्ट कैंसर के 40 और गैर-कैंसर के 40 सैंपल शामिल हैं। इन सैंपलों के आधार पर एआई मॉडल को प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि वह कैंसर की सटीक पहचान कर सके।
डॉ. सिंह के अनुसार, इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में ही हो सकेगी। वर्तमान में अधिकांश मरीज तीसरी या चौथी स्टेज में अस्पताल पहुंचते हैं, जिससे इलाज जटिल और महंगा हो जाता है। नई तकनीक के जरिए कम लागत में शुरुआती जांच संभव होगी। इससे मरीज समय रहते विशेषज्ञ चिकित्सकों तक पहुंच सकेंगे और उपचार की सफलता की संभावना भी बढ़ेगी।
ऐसे काम करेगा एप
यदि किसी व्यक्ति के मुंह में लंबे समय से घाव या छाला है या किसी महिला के स्तन में गांठ है, तो डॉक्टर या पैथोलॉजी लैब में उसका छोटा सैंपल लेकर स्लाइड तैयार की जाएगी। इस स्लाइड को माइक्रोस्कोप के नीचे रखकर उसकी तस्वीर मोबाइल से खींची जाएगी और ऐप पर अपलोड की जाएगी। एआई उस तस्वीर का विश्लेषण कर पहले से उपलब्ध हजारों रिपोर्टों और डेटा से उसकी तुलना करेगा। इसके बाद एप यह बताएगा कि कैंसर की आशंका है या नहीं और यदि हैं तो उसकी प्रकृति क्या हो सकती है।










