सोशल संवाद / डेस्क : सरायकेला-खरसावां जिले की ऐतिहासिक खरसावां रथ यात्रा एक बार फिर श्रद्धा, आस्था और परंपरा के रंग में रंगी नजर आई। करीब 200 वर्षों से चली आ रही राज परिवार की इस ऐतिहासिक रथ यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना की।

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पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ महाप्रभु राजमहल, खरसावां से अपनी मौसी बाड़ी के लिए पारंपरिक रथ पर विराजमान होकर रवाना हुए। जैसे ही रथ यात्रा शुरू हुई, श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। पूरे मार्ग में भक्तों ने जय जगन्नाथ के जयकारों के साथ भगवान के दर्शन किए और रथ खींचने का सौभाग्य प्राप्त किया।
इस अवसर पर खरसावां राज परिवार के कुंवर अनूप सिंह देव ने कहा कि राज परिवार की रथ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि 200 वर्षों से चली आ रही ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर है। उन्होंने बताया कि यह रथ अपनी ऐतिहासिक पहचान के कारण देशभर में प्रसिद्ध है और खरसावां को धार्मिक एवं पर्यटन के नक्शे पर विशेष पहचान दिला रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि भगवान जगन्नाथ की इस परंपरा को संरक्षित रखने के लिए हर वर्ष भव्य आयोजन किया जाता है। ओडिशा की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी इस पर्व की शोभा बढ़ाती हैं, जिससे दोनों राज्यों की साझा धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को मजबूती मिलती है।
वहीं, खरसावां के राजा साहब गोपाल नारायण सिंह देव ने कहा कि राज परिवार को अपनी समृद्ध परंपरा और इतिहास पर गर्व है। उन्होंने कहा कि रथ यात्रा सामाजिक एकता, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इस शुभ अवसर पर उन्होंने खरसावांवासियों सहित देशभर के श्रद्धालुओं को रथ यात्रा की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
हर वर्ष आयोजित होने वाली यह ऐतिहासिक रथ यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि खरसावां की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन को भी नई पहचान देने का कार्य कर रही है।










