सोशल संवाद / चांडिल : आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा के पावन अवसर पर नौरंगराय सूर्यादेवी सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, चांडिल में गुरु पूर्णिमा का उत्सव श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के प्रभारी प्रधानाचार्य सुब्रत चटर्जी और परिमल महतो द्वारा सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन एवं महर्षि वेदव्यास के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई।

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इस अवसर पर प्रभारी प्रधानाचार्य सुब्रत चटर्जी ने सभी को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में गुरु का स्थान सर्वोच्च होता है। गुरु के मार्गदर्शन और शिक्षा से ही व्यक्ति अपने जीवन को सही दिशा देता है तथा अपनी प्रतिभा को समाज के सामने प्रस्तुत करने में सफल होता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में गुरु को भगवान के समान दर्जा दिया गया है। शास्त्रों में भी गुरु के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि गुरु के बिना ज्ञान और ईश्वर की प्राप्ति दोनों ही अधूरे हैं।
उनके प्रसिद्ध दोहे—
“गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूँ पाय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।”
का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि संस्कार भी प्रदान करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि माता-पिता हमारे प्रथम गुरु होते हैं और विद्यालय के शिक्षक बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए प्रत्येक गुरु का संस्कारवान और आदर्श होना आवश्यक है।
कार्यक्रम के दौरान उषा दीदी ने गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर अपने विचार रखे, जबकि तनुश्री दीदी ने महर्षि वेदव्यास के जीवन, उनके योगदान और गुरु पूर्णिमा के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
विद्यालय के विद्यार्थियों ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर भाषण, कविता, गीत और मनमोहक सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम में गुरु के प्रति सम्मान और भारतीय संस्कृति की झलक स्पष्ट रूप से देखने को मिली।
अंत में परिमल आचार्य ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, अभिभावकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस अवसर पर विद्यालय के सभी आचार्य एवं दीदियों का आयोजन को सफल बनाने में सराहनीय योगदान रहा।









