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उत्कल एसोसिएशन विवाद: संरक्षक एसके बेहरा ने दिया इस्तीफा, संगठन में बढ़ते मतभेदों पर जताई चिंता

By Sanjana Das

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उत्कल एसोसिएशन विवाद: संरक्षक एसके बेहरा ने दिया इस्तीफा, संगठन में बढ़ते मतभेदों पर जताई चिंता

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सोशल संवाद /जमशेदपुर : उत्कल एसोसिएशन, जमशेदपुर में चल रहे विवाद के बीच संगठन को बड़ा झटका लगा है. संस्था के संरक्षक एसके बेहरा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने ट्रस्टी मनोरंजन दाश के साथ बैठक के बाद यह निर्णय लिया. इस्तीफे के पीछे उन्होंने संगठन में लगातार बढ़ रहे विवाद, आपसी मतभेद और मामला न्यायालय तक पहुंचने को प्रमुख कारण बताया.

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एसके बेहरा ने कहा, “मैं ऐसा इंसान हूं, जहां ज्यादा विवाद होता है वहां से खुद को किनारा करने में ही भलाई समझता हूं. मैं हमेशा संस्था का बाहर से समर्थन करता रहा हूं, लेकिन अब उससे भी दूरी बना रहा हूं.”

उन्होंने कहा कि वार्षिक आम सभा (AGM) के दौरान चुनाव को लेकर कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं लाया गया. इसके बावजूद चुनाव के मुद्दे को लेकर विवाद को हवा दी गई और मामला गलत दिशा में चला गया. उनका कहना है कि इसी कारण आज मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया है, जिससे पूरे उड़िया समाज की छवि प्रभावित हो रही है.

एसके बेहरा ने कहा कि AGM से पहले उन्होंने सभी पक्षों के बीच संवाद स्थापित कर विवाद सुलझाने का प्रयास किया था, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं मानी. यदि समय रहते आपसी सहमति से समाधान निकाल लिया जाता तो मामला अदालत तक नहीं पहुंचता.

उन्होंने संगठन में 109 नए सदस्यों को जोड़े जाने के मुद्दे पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसकी पारदर्शी और स्पष्ट जानकारी समाज के सामने रखी जानी चाहिए. इससे अनावश्यक विवाद और भ्रम की स्थिति पैदा हुई है.

बेहरा ने आरोप लगाया कि संगठन के महासचिव तरुण महंती अपनी जिद पर अड़े हुए हैं. उन्होंने कहा कि दो गुटों में बंटे समाज का विवाद अब सार्वजनिक हो गया है, जिससे पूरे उड़िया समाज की बदनामी हो रही है. उन्होंने यह भी कहा कि संस्था से जुड़े स्कूल को लेकर भी लगातार विवाद सामने आ रहे हैं, जो चिंता का विषय है.

उन्होंने सुझाव दिया कि कमेटी से बाहर हुए 16 सदस्यों को पुनः शामिल किया जाए और प्रस्तावित चुनाव को दो से तीन महीने के लिए स्थगित कर सभी पक्षों को साथ बैठाकर सर्वसम्मति से समाधान निकाला जाए. उनका कहना है कि संस्था किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे समाज की धरोहर है, इसलिए व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर संगठन की एकता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.

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