सोशल संवाद / डेस्क :देश के प्रख्यात शिक्षाविद, समाजसेवी और बिहार, पश्चिम बंगाल तथा त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल डॉ. डी.वाई. पाटिल का मंगलवार को महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित उनके आवास पर लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 91 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से शिक्षा जगत, राजनीतिक गलियारों और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

डॉ. डी.वाई. पाटिल ने अपने जीवन में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उन्होंने देशभर में कई शैक्षणिक संस्थानों, मेडिकल कॉलेजों, इंजीनियरिंग कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की स्थापना कर लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को नई दिशा दी। शिक्षा के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से भी सम्मानित किया था।
राजनीतिक जीवन में भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वह त्रिपुरा, बिहार और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे तथा अपने कार्यकाल के दौरान संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा और गरिमा के साथ किया। सार्वजनिक जीवन में उनकी सादगी, प्रशासनिक अनुभव और शिक्षा के प्रति समर्पण को हमेशा याद किया जाएगा।
परिवार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, डॉ. डी.वाई. पाटिल का अंतिम संस्कार बुधवार को कोल्हापुर में राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में राजनीतिक हस्तियों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों के पहुंचने की संभावना है।
उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों और शिक्षा जगत से जुड़े अनेक लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। सभी ने उन्हें दूरदर्शी शिक्षाविद, प्रेरणास्रोत और समाज के लिए समर्पित व्यक्तित्व बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है।
डॉ. डी.वाई. पाटिल का निधन देश के शिक्षा और सार्वजनिक जीवन के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को लंबे समय तक प्रेरित करता रहेगा।









