सोशल संवाद / रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की सहायक आचार्य (Assistant Acharya) भर्ती में नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर झारखंड हाईकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनने के बाद जेएसएससी को सभी उठाए गए बिंदुओं पर विस्तृत जवाब तैयार करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को होगी।

यह भी पढ़े : पुलिस नहीं मिली, घर तोड़ने का अभियान टला
100 से अधिक याचिकाओं पर हुई सुनवाई
इस मामले में गिरिधर राउत सहित 100 से अधिक अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार, अधिवक्ता चंचल जैन, अमृतांश वत्स और शुभम मिश्रा ने अदालत में अपना पक्ष रखा।
नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि सरकार ने जेएसएससी को सहायक आचार्य भर्ती की अधियाचना सहायक आचार्य नियुक्ति नियमावली-2022 के तहत भेजी थी। उनका दावा है कि इस नियमावली में नॉर्मलाइजेशन का कोई प्रावधान नहीं है, फिर भी भर्ती विज्ञापन में नॉर्मलाइजेशन लागू कर दिया गया।
अभ्यर्थियों का कहना है कि जब एक ही परीक्षा केंद्र पर एक ही समय में परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों के मूल अंक समान थे, तो नॉर्मलाइजेशन के बाद उनके अंकों में अंतर कैसे आ गया। इसे लेकर उन्होंने पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
पारा और नन-पारा शिक्षकों को लेकर भी आपत्ति
याचिका में यह भी कहा गया कि पारा शिक्षक और नन-पारा शिक्षक अभ्यर्थियों का एक साथ नॉर्मलाइजेशन कर दिया गया। साथ ही आरोप लगाया गया कि नन-पारा शिक्षक श्रेणी में भी पारा शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई, जबकि पारा शिक्षकों के लिए पहले से 50 प्रतिशत सीटें आरक्षित थीं।
अनुपस्थित दिखाकर फेल करने का आरोप
कुछ अभ्यर्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि परीक्षा में शामिल होने के बावजूद उन्हें रिकॉर्ड में अनुपस्थित दिखा दिया गया और परिणाम में असफल घोषित कर दिया गया।
हाईकोर्ट ने JSSC से मांगा जवाब
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने जेएसएससी को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए सभी बिंदुओं पर तैयारी के साथ अगली सुनवाई में अपना पक्ष रखें। अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को होगी।









